नई दिल्ली, १० मई। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण के संबंध में दिए गए बयान के बारे में अदालत को सूचित किए जाने के बाद सार्वजनिक बयान नहीं दिया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिए गए एक बयान का हवाला दिया।
पीठ ने कहा कि अदालत इस तरह के राजनीतिकरण की अनुमति नहीं दे सकती, जब हम मामले की सुनवाई कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, जब मामला विचाराधीन है और शीर्ष अदालत के समक्ष है तो इस तरह के बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
कर्नाटक सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि कोई भी धर्म-आधारित आरक्षण असंवैधानिक है। कथित तौर पर गृह मंत्री ने मुस्लिम आरक्षण को संविधान के खिलाफ बताया है। मेहता ने इस तरह के एक बयान के बारे में कोई जानकारी होने से इनकार किया।
दवे ने तर्क दिया कि वह अदालत के समक्ष मंत्री के बयान को रिकॉर्ड पर ला सकते हैं। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है और इस पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने मेहता का बयान दर्ज किया कि मुसलमानों को ४ प्रतिशत आरक्षण खत्म करने के राज्य सरकार के २७ मार्च के फैसले पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दलीलों के बाद पीठ ने मामले की सुनवाई जुलाई तक के लिए टाल दी।



