नई दिल्ली, 27 अक्टूबर। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इस साल अहोई अष्टमी 28 अक्टूबर को मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। मान्यता है कि अहोई माता की पूजा करने से मां पार्वती अपने पुत्रों की तरह अपने भक्तों की संतान की भी रक्षा करती है। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से संतान के सभी संकट दूर होते हैं और इसी कारण इस व्रत का बहुत महत्व माना गया है। इस दिन मां अपनी संतान के कल्याण और उसकी सुरक्षा के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।
व्रत के एक दिन पहले से ही व्रत के नियमों का पालन शुरू हो जाता है। व्रत की पूर्व संध्या पर सात्विक भोजन करने के बाद महिलाएं रात्रि 12 बजे के बाद से कुछ भी नहीं खाती हैं।
अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर देवी का स्मरण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके पश्चात अहोई माता के पूजन हेतु दीवार अथवा कागज पर गेरू से अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया जाता है। अहोई अष्टमी की पूजा विशेषकर संध्या काल में ही होती है। इसलिए संध्या के समय पूजन हेतु अहोई माता के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर जल से भरा कलश रख दें और माता को रोली व अक्षत अर्पित कर उनका सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद मीठे पुए या आटे का हलवे का प्रसाद चढ़ाएं। कलश पर स्वास्तिक बना कर हाथ में गेहूं के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनें। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न करें।



