पन्चान्यो मनुष्येण परिचया प्रयत्नतरू ।
पन्चान्यो मनुष्येण परिचया प्रयत्नतरू । पिता माताग्निरात्मा च गुरुश्च भरतर्षभ ।। अर्थात्:- हे भरतश्रेष्ठ ! पिता, माता, अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए। इस श्लोक में पिता, माता, अग्नि,