ऐसे राज्यों में, जहां भाजपा विरोधी प्रादेशिक पार्टियों की सरकार है और जहां भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी है वहां पिछले कुछ दिन से लगातार राष्ट्रपति शासन की चर्चा सुनाई दे रही है। सत्तारूढ़ पार्टियां खुद ही प्रचार कर रही हैं उनके यहां राष्ट्रपति शासन लग सकता है। भाजपा की राजनीति और केंद्रीय एजेंसियों, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं की सक्रियता की वजह से भी अटकल लगाई जा रही है कि सरकारें खतरे में हैं। जहां भाजपा मुख्य विपक्षी नहीं है जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्यों में इस तरह की चर्चा नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और झारखंड तीनों राज्यों में राष्ट्रपति शासन की चर्चा खूब सुनाई दे रही है।
महाराष्ट्र में मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर भाजपा खूब सक्रिय है और वहां केंद्रीय एजेंसियां भी खूब सक्रिय हैं। सत्तारूढ़ महाविकास अघाड़ी में शामिल तीनों पार्टियों- शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं पर शिकंजा कसा है। एक दर्जन से ज्यादा नेता सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग के लपेटे में हैं। हनुमान चालीसा और लाउडस्पीकर का विवाद अलग चल रहा है। तभी संजय राउत बार बार कह रहे हैं कि केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासनल गाना चाहती है।
इसी तरह झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने नाम से खदान आवंटित कराके लाभ के पद के मामले में फंसे हैं तो उनका पूरा परिवार किसी न किसी घोटाले में आरोपी है। उनकी सदस्यता पर चुनाव आयोग की तलवार लटकी है। अगर मुख्यमंत्री का इस्तीफा होता है या किसी तरह की अस्थिरता होती है तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है। ऐसे ही पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था का बड़ा मुद्दा बना है और हिंसा के मामले में केंद्रीय एजेंसियों एक के बाद एक तृणमूल नेताओं को गिरफ्तार कर रही है। तभी तृणमूल के नेता भी आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लगाने की साजिश रच रही है।



