नई दिल्ली। पाकिस्तान पर भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक के बाद भारत ने शब्दों का भी सटीक चयन कर इस्लामाबाद के हाथ बांध दिए। भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले ने मंगलवार को अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘नॉन मिलिटरी प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक’ और जिहादी शब्द का प्रयोग कर पड़ोसी देश को बोलने का मौका ही नहीं दिया। शब्दों के स्तर पर यह भारत की आक्रामक कूटनीति थी। इसके अलावा नई दिल्ली ने कूटनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपना पक्ष समझाया। पाक के आतंकी कैंपों पर किया गया हमला किसी भी तरह से सरप्राइज नहीं है क्योंकि पुलवामा अटैक के बाद ही ऐसे संकेत दे दिए गए थे। एलओसी के आसपास स्थित आतंकी कैंपों पर हमले के संकेत भारत की तरफ से दिए गए थे। यह कदम इसलिए भी आश्चर्यचकित करनेवाला नहीं है क्योंकि पुलवामा अटैक के बाद ही अमेरिकी प्रेजिडेंट डॉनल्ड ट्रंप ने कहा था कि भारत कुछ बड़ा और कठोर कदम उठाने जा रहा है।
एयर स्ट्राइक के बाद भारत कूटनीतिक स्तर पर भी अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। एयर स्ट्राइक पर सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने समर्थन दिया। ऑस्ट्रेलिया ने भारत का समर्थन करते हुए पाकिस्तान से अपनी जमीन पर काम कर रहे आतंकी संगठनों पर सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की। इनमें जैश-ए-मोहम्मद भी शामिल है जिसने पुलवामा अटैक की जिम्मेदारी ली है। ईयू के कई देशों ने भी खुलकर भारत का समर्थन किया है और जर्मनी ने भी पाकिस्तान से अपनी जमीन पर आतंक को समर्थन बंद करने के लिए कहा है। ऑस्ट्रेलिया की तरफ से जारी बयान में कहा, ‘पाकिस्तान को अपनी जमीन पर फल-फूल रहे जैश-ए-मोहम्मद जैसे चरमपंथी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे चरमपंथी संगठनों को पाक की जमीन पर और दूसरी कोई कानूनी सहायता तत्काल मिलनी बंद होनी चाहिए।’ कूटनीतिक समर्थन के लिए वुहान में चीन और रूस के अपने समकक्षों के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत का पक्ष रखेंगी।



