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भारत और पाकिस्तान ने परमाणु संस्थानों की सूची साझा की, अपनी जेलों में बंद कैदियों की जानकारी भी सौंपी

नई दिल्ली ,02 जनवरी। भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे को अपनी-अपनी परमाणु प्रतिष्ठानों और फैसिलिटीज की जानकारी दी ताकि शत्रुता की स्थिति में वे इनसे एक-दूसरे पर हमला न करें। पिछले तीन दशक से चली आ रही शत्रुता के बावजूद दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों की पुरानी परंपरा को बनाए रखा है। दोनों देशों ने एक-दूसरे की जेलों में बंद कैदियों की सूची भी साझा की। इस दौरान भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान से कैदियों, लापता भारतीय रक्षा कर्मियों और मछुआरों की शीघ्र रिहाई की मांग की। परमाणु प्रतिष्ठानों और फैसिलिटीज की सूची नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक चैनलों के माध्यम से दी गई। शनिवार को दोनों देशों के राजनयिकों ने परमाणु प्रतिष्ठानों की जानकारी के साथ-साथ एक-दूसरे पर इन हथियारों से हमला न करने का समझौता किया।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, दोनों देशों के बीच इस तरह की सूचियों का लगातार 31वां आदान-प्रदान है, सबसे पहला समझौता जनवरी 1992 को हुआ था।
नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक चैनलों के माध्यम से जो जानकारी साझा की गई, इसके मुताबिक भारत में वर्तमान में 282 पाकिस्तानी नागरिक कैदी और 73 मछुआरे हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान की हिरासत में 51 नागरिक कैदी और 577 मछुआरे हैं जो या तो भारतीय हैं या भारतीय माने जाते हैं। इन सूचियों का आदान-प्रदान मई 2008 में हस्ताक्षरित कांसुलर एक्सेस पर समझौते के प्रावधानों के अनुरूप किया जाता है। इस समझौते के तहत, दोनों पक्ष हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को व्यापक सूचियों का आदान-प्रदान करते हैं।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने पाकिस्तान की हिरासत से नागरिक कैदियों, लापता भारतीय रक्षा कर्मियों और मछुआरों को उनकी नौकाओं के साथ जल्द से जल्द रिहा करने और स्वदेश भेजने का आह्वान किया है। इस संदर्भ में, पाकिस्तान को दो भारतीय नागरिक कैदियों और 356 मछुआरों की रिहाई में तेजी लाने के लिए कहा गया, जिनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि पहले ही की जा चुकी है और पाकिस्तान को अवगत करा दिया गया है। बयान में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान को 182 भारतीय मछुआरों और 17 नागरिक कैदियों को तत्काल कांसुलर एक्सेस प्रदान करने के लिए भी कहा गया था, जो पाकिस्तान की हिरासत में हैं और जो भारतीय हैं।
डॉक्टरों की टीम का वीजा देने में तेजी का अनुरोध
भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान से चिकित्सा विशेषज्ञों की एक टीम के सदस्यों को वीजा देने में तेजी लाने का अनुरोध किया। इसका मकसद विक्षिप्त मानसिक स्थिति वाले भारतीय कैदियों की मानसिक स्थिति का आकलन करना है जो अलग-अलग जेलों में सजा काट रहे हैं।
कब शुरु हुआ था ये समझौता
इस समझौते की शुरुआत 31 दिसंबर 1988 को हुई थी। जबकि 27 जनवरी 1991 को ये समझौता लागू हुआ था। इसके तहत भारत-पाकिस्तान आने वाले परमाणु प्रतिष्ठानों के बारे में हर साल एक जनवरी को एक दूसरे को बताते हैं। पहली बार एक जनवरी 1992 को ये जानकारी साझा की गई थी और तब के बाद से लगातार 30वीं बार ये जानकारी साझा की गई।

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