नई दिल्ली ,५ मई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपदा अवरोधी अवसंरचना पर चौथे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को आज वीडियो संदेश के माध्यम से सम्बोधित किया। सत्र को ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री महामहिम स्कॉट मॉरिसन, घाना के राष्ट्रपति महामहिम नाना एडो डंकवा अकूफ़ो-एडो, जापान के प्रधानमंत्री महामहिम फूमिओ किशीदा और मैडागास्कर के राष्ट्रपति महामहिम आंद्रे निरिना राजोलिना ने भी सम्बोधित किया।
अपने वक्तव्य के आरंभ में ही प्रधानमंत्री मोदी ने उपस्थित जनों को सतत विकास लक्ष्यों के उस संकल्प की याद दिलाई कि कोई भी पीछे न छूटने पाये। उन्होंने कहा, इसीलिये हम अगली पीढ़ी वाली अवसंरचना का निर्माण करके निर्धनतम और अत्यंत जोखिम वाले वर्गों की आवश्यकताओं को मद्देनजर रखते हुये उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये अपनी प्रतिबद्धता पर कायम हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि अवसंरचना का मंतव्य जन और लोगों को समानता के आधार पर उच्च गुणवत्ता, भरोसेमंद और सतत सेवायें प्रदान करना होता है। उन्होंने कहा, लोगों को किसी भी अवसंरचना विकास गाथा के मर्म में होना चाहिये। भारत बिलकुल यही कर रहा है।
भारत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, बिजली, यातायात आदि-इत्यादि जैसे क्षेत्रों में बुनियादी सेवा के प्रावधान को लगातार बढ़ा रहा है, जिसके परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री ने कहा, हम लोग बहुत स्पष्ट तरीके से जलवायु परिवर्तन का मुकाबला कर रहे हैं। यही कारण है कि हम कॉप-२६ में अपने विकास प्रयासों के समानान्तर २०७० तक ‘नेट-ज़ीरो’ को हासिल करने के लिये संकल्पित हैं।



