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कैनेडा में फिर से ट्रूडो सरकार, परिणामों में भारतीय समुदाय चमका

ओटावा,22 सितंबर। जस्टिन ट्रूडो को कैनेडा के लोगों ने एक बार फिर अपने प्रधानमंत्री के रूप में चुना है। कैनेडा में पहले चरण का मतदान होने के बाद आए परिणामों से बाद पता चला है कि देश के मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी सत्ता में वापसी कर रही है। लेकिन बहुमत हासिल करने के लिए ट्रूडो ने जो दांव खेला था उसमें वे हारते नजर आए।
प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में बहुमत हासिल करने के लिए मध्यावधि चुनाव कराने का जुआ खेला था, लेकिन इससे उनपर सत्ता से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था। चुनाव में ट्रूडो की लिबरल पार्टी और प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी के बीच कांटे की टक्कर थी। हालांकि इन सब के बाद लिबरल पार्टी को 338 में से 156 सीटों पर आगे थी और कंजरवेटिव्स को 123 पर। ब्लॉक क्यूबेकॉइस पार्टी 29 सीटों पर आगे थी और 28 पर लेफ्टिस्ट न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी। इसके अलावा द ग्रीन्स 2 सीटों पर आगे थी।
ट्रूडो ने 2015 में अपने पिता एवं दिवंगत प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो की लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए चुनाव जीता था, लेकिन उनसे अत्यधिक अपेक्षाओं, घोटालों और वैश्विक महामारी के बीच चुनाव कराने के पिछले महीने लिए गए फैसले से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा था।
ट्रूडो दुनिया के अधिकतर देशों की तुलना में कोरोना वायरस वैश्विक महामारी से बेहतर तरीके से निपटे और उन्हें भरोसा था लोग इसके लिए उन्हें पुरस्कृत करेंगे और लोगों ने ऐसा ही किया।
ट्रूडो ने देश की जनता को चेताया कि उनके प्रतिद्वंद्वी महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई को कमजोर करेंगे। उन्होंने कहा कि कैनेडा के लोगों को ऐसी सरकार की जरुरत है, जो विज्ञान पर भरोसा करे। उन्होंने मांट्रियल में रविवार को चुनाव प्रचार अभियान समाप्त करते हुए कहा था, ”हमें कंजर्वेटिव सरकार की जरुरत नहीं है, जो टीकाकरण के क्षेत्र में नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर सकेगी और न ही विज्ञान के क्षेत्र में हमें उसकी जरुरत है।”
इन चुनाव परिणामों से कैनेडा में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी अच्छी खबर सामने आई है। इस बार हाउस ऑफ कॉमन्स में भारतीय-कैनेडियन लोगों का एक बड़ा दल होगा, क्योंकि कैनेडा के चुनाव में इस समुदाय के 18 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। हाल ही में भंग हुए कैबिनेट में शामिल सभी तीनों भारतीय-कैनेडियन मंत्री विजयी हुए हैं। उनमें न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) के जगमीत सिंह भी शामिल हैं।
कैनेडा के रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन लगभग 49 प्रतिशत वोट शेयर के साथ वैंकूवर दक्षिण से फिर से चुने गए हैं। उनके कार्यकाल में कैनेडा के सशस्त्र बलों में एक बड़े यौन उत्पीड़न संकट को लेकर बहुत आलोचना हुई। इंडो- कैनेडियन लोगों में मंत्री अनीता आनंद का भी नाम शामिल है। उन्होंने ओकविले, ओन्टेरियो से अपनी सीट बरकरार रखी। वहीं, युवा मंत्री बर्दिश चागर ने भी जीत दर्ज की है।
एनडीपी नेता जगमीत सिंह लगभग 38 प्रतिशत वोटों के साथ बर्नाबी साउथ से फिर से चुने गए। हालांकि, उनका ध्यान उनके नेतृत्व वाली पार्टी के राष्ट्रीय प्रदर्शन पर रहा होगा, क्योंकि एनडीपी ने अपना वोट शेयर 2019 में 15.98 प्रतिशत से बढ़ाकर 17.7 प्रतिशत कर लिया था। हाउस ऑफ़ कॉमन्स में उनकी पार्टी की सीट 24 से बढ़कर 25 हो गई है।
इंडो-कैनेडियन लिबरल पार्टी के जॉर्ज चहल ने भी जीत हासिल की है। उन्होंने अल्बर्टा में कैलगरी स्काईव्यू से कंजरवेटिव सांसद जग सहोता को मात दी है। जस्टिन ट्रूडो की सत्तारूढ़ पार्टी को 2019 में इस प्रांत में एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी। इस सीट पर पहली बार सांसद बनने वाले चहल को संभवतः अगले कैबिनेट में जगह मिल सकती है।
ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र के कई मौजूदा सांसद फिर से चुने गए। उनमें से सबसे प्रमुख हैं ब्रैम्पटन वेस्ट से पूर्व संसदीय सचिव कमल खेरा, ब्रैम्पटन नॉर्थ से रूबी सहोटा, ब्रैम्पटन साउथ से सोनिया सिद्धू और पार्कडेल-हाई पार्क से आरिफ विरानी। इसके अलावा सुख धालीवाल ने अपनी सरे-न्यूटन सीट बरकरार रखी, जबकि रणदीप सराय ने सरे से फिर से जीत हासिल की। क्यूबेक में डोरवाल-लाचिन-लासाल से अंजू ढिल्लों को लगातार तीसरी बार जीत हासिल हुई है। ओटावा के पास नेपियन से चंद्र आर्य ने भी इस चुनाव में जीत दर्ज की है।

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