इस्तांबुल,24 अक्टूबर। तुर्की के ने घरेलू मामलों में दखल देने का आरोप लगाते हुए कैनेडा, अमेरिका, फ्रांस, समेत 10 देशों के राजदूतों को देश से निकालने का फरमान सुनाया है। राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने अपने विदेश मंत्रालय से इन राजदूतों को परसोना नान ग्राटा यानी ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित करने का आदेश दिया है। इन देशों ने उस्मान कवला की रिहाई का समर्थन किया है, जिसके कारण इनके राजदूतों को निकालने का आदेश दिया गया है।
कैनेडा, नीदरलैंड्स, अमेरिका, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, नार्वे और न्यूजीलैंड आदि देशों के राजनयिकों को मंगलवार को विदेश मंत्रालय में तलब किया गया था। गौरतलब है कि किसी राजनयिक को अवांछित व्यक्ति घोषित करने का आशय सामान्य रूप से यह होता है कि व्यक्ति के उसके मेजबान देश में आगे बने रहने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। इन राजदूतों को 48 से 72 घंटे के अंदर तुर्की से बाहर जाना होगा। इन राजदूतों ने सामाजिक कार्यकर्ता उस्मान कवला की रिहाई का समर्थन किया था। आपको बता दें कि कवला अपराध के मामले में दोषी करार नहीं दिए जाने के बाद भी 2017 से जेल में बंद हैं।
कावला पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की फाइनेंसिंग करने का आरोप है। हालांकि कावला की ओर से इन आरोपों से हमेशा इनकार किया जाता रहा है।
दरअसल बीते दिनों कैनेडा, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, न्यूजीलैंड और अमेरिका के राजदूतों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कवला के रिहाई की मांग की थी। राजदूतों का कहना था कि कवला के मामले का न्यायसंगत समाधान किया जाए।
तुर्की की ओर से राजदूतों की ओर से जारी संयुक्त बयान को गैर जिम्मेदाराना बताया गया था। उनके बयान को ‘धृष्टता’ करार देते हुए एर्दोगन ने कहा कि उन्होंने राजदूतों को अवांछित घोषित करने का आदेश दिया है।



