नई दिल्ली, 26 जुलाई। आज देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जा रहा है। करगिल युद्ध को 22 साल हो गए, लेकिन आज भी इसे लेकर कुछ मलाल बाकी हैं। सन् 1999 की गर्मियों में युद्ध छिड़ा था तो उस समय सेना की कमान जनरल वीपी मलिक के हाथों में थी और वह सैन्य प्रमुख थे। जनरल वीपी सिंह के मन में इससे जुड़े कुछ मलाल आज भी शेष है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को खदेड़ कर रख दिया था। जनरल वीपी मलिक का मानना है कि सीजफायर का ऐलान करने से पहले ही भारत सरकार को अपनी सेना को एलओसी से सटे पाकिस्तानी क्षेत्रों पर कब्जा करने की इजाजत दे देनी चाहिए थी। एक इंटरव्यू में वीपी मलिक ने कहा कि जब युद्ध शुरू हुआ तब हमें कुछ भी नहीं पता था और हम पाकिस्तान की ओर से अचानक पैदा की गई स्थिति का सामना कर रहे थे। खुफिया तंत्र और सर्विलांस के फेल्योर की वजह से सरकार के अंदर घुसपैठियों की पहचान को लेकर काफी भ्रम की स्थिति थी। हमारी फ्रंटलाइन फॉर्मेशन घुसपैठ का पता लगाने में नाकामयाब रही थी और हमें उनकी लोकेशन के बारे में कुछ पता नहीं था। कुछ समय बाद भारतीय सेना करगिल में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हुई, तब सरकार को संघर्षविराम पर राजी होने से पहले, हमें एलओसी से सटे कुछ पाकिस्तानी क्षेत्रों पर कब्जा करने की इजाजत देनी चाहिए थी।



