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कंजरवेटिव्स ने की रक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग

ओटावा। कंजरवेटिव लीडर्स प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो से रक्षा मंत्री हरजीत सज्जन को बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं, उनका तर्क है कि उन्होंने मिलिट्री सेक्सुअल मिसकंडक्ट क्राइसिस पर आर्म्ड फोर्सेज का विश्वास खो दिया है। कैनेडा की संसद में प्रश्नकाल के दौरान तीखी नोकझोंक करते हुए कंजरवेटिव नेता एरिन ओ’टोल ने सज्जन पर पिछले छह वर्षों में कई मौकों पर संकट से मिसहैंडलिंग करने का आरोप लगाया।
सज्जन के इस्तीफे की मांग दो धमाकेदार घटनाक्रम के एक दिन बाद की गई है।
पहला सेना के सेकंड-इन-कमांड लेफ्टिनेंट जनरल माइक रूलेउ ने इस सप्ताह अपने इस्तीफे की घोषणा तब की जब खबरें आईं कि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में डिफेंस स्टाफ के पूर्व प्रमुख जोनाथन वेंस के साथ गोल्फ खेला था, जो यौन दुराचार के आरोप में जांच के दायरे में हैं हालांकि वैंस ने आरोप से इनकार किया है।
दूसरा मेजर-जनरल डैनी फोर्टिन ने भी सोमवार को एक कानूनी चुनौती दायर की, जिसमें पिछले महीने सार्वजनिक रूप से अपने दूसरे कार्यकाल को समाप्त करने के निर्णय के खिलाफ दावा किया गया था क्योंकि कैनेडियन वैक्सीन रोलआउट के हेड, सज्जन द्वारा राजनीतिक हस्तक्षेप से प्रेरित थे।
गौरतलब है कि कैनेडियन फोर्सेज नेशनल इन्वेस्टिगेशन सर्विस द्वारा यौन दुराचार की जांच को क्यूबेक प्रॉसीक्यूशन सर्विस को रेफर करने के कुछ दिन पहले, फोर्टिन को मई के मध्य में वैक्सीन रोलआउट से हटा दिया गया था, ताकि यह तय किया जा सके कि आपराधिक आरोप लगाए जाने चाहिए या नहीं। फोर्टिन ने यौन दुराचार के दावे का खंडन किया है।
इस संबंध में बेल्जियम से बोलते हुए, जहां महामारी शुरू होने के बाद से प्रधान मंत्री अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा समाप्त कर रहे थे, ट्रूडो ने कहा कि सेना में यौन दुराचार की समस्या बहुत लंबे समय से अनसुलझी है। ट्रूडो ने कहा। “मैं सभी को आश्वस्त कर सकता हूं कि हमारी सामूहिक सुरक्षा को आश्वस्त करने के लिए कैनेडा और उसकी सेना की निरंतर क्षमता सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।”
ट्रूडो ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश लुईस आर्बर को सेना में यौन उत्पीड़न और दुराचार की बाहरी समीक्षा का नेतृत्व करने के अपनी सरकार के फैसले की जानकारी दी। दरअसल यह मामला सेना से जुड़ा होने के कारण जनता इससे सीधा जुड़ाव महसूस कर रही है। एक तरफ जहां आर्म्ड फोर्सेज के जवानों तथा अफसरों का मनोबल इससे गिर रहा है वहीं जनता में भी आर्म्ड फोर्सेज के प्रति सम्मान की भावना में कमी आई है। सरकार के लिए इस संकट से उबरना एक चुनौती के समान है।

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