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अब्दुलरजाक गुरनाह को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार

टोरंटो, 8 अक्टूबर। तंजानियाई मूल के सुप्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक अब्दुलरजाक गुरनाह को वर्ष 2021 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। ‘उपनिवेशवाद के प्रभावों को बिना समझौता किये और करुणा के साथ समझने’ में उनके योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किया गया है।
जांजीबार में 1948 में जन्मे गुरनाह 1968 में हिंद महासागरीय द्वीप में विद्रोह के बाद किशोर शरणार्थी के रूप में ब्रिटेन आ गये थे। इंग्लैंड में रहने वाले लेखक अब्दुलरजाक गुरनाह यूनिवर्सिटी ऑफ केंट में प्रोफेसर हैं। उनके उपन्यास ‘पैराडाइज’ को 1994 में बुकर पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। वह सामाजिक मुद्दों के साथ-साथ बेहतरीन राजनीतिक समझ भी रखते हैं । समकालीन लेखकों में उनका एक अलग स्थान है। उनके विशिष्ट लेखन के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया है। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के तहत एक गोल्ड मेडल और एक करोड़ स्वीडिश क्रोनर (लगभग 11.4 लाख डॉलर) की राशि इनाम में दी जाएगी। गुरनाह ने कहा कि वह पुरस्कार के लिए चुने जाने पर सम्मानित महसूस कर रहे हैं।
गुरनाह ने कहा कि उन्होंने अपने लेखन में विस्थापन और प्रवासन के जिन विषयों को खंगाला, वे हर रोज सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि वह 1960 के दशक में विस्थापित होकर ब्रिटेन आये थे और आज यह चीज पहले से ज्यादा दिखाई देती है।
गुरनाह ने कहा, ‘दुनियाभर में लोग मर रहे हैं, घायल हो रहे हैं। हमें इन मुद्दों से अत्यंत करुणा के साथ निपटना चाहिए।’
गौरतलब है कि गुरनाह के उपन्यास ‘पैराडाइज’ को 1994 में बुकर पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। उन्होंने कुल 10 उपन्यास लिखे हैं। साहित्य के लिए नोबेल समिति के अध्यक्ष एंडर्स ओल्सन ने उन्हें ‘दुनिया के उत्तर-औपनिवेशिक काल के सर्व प्रतिष्ठित लेखकों में से एक’ बताया।

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