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सिख दंगे में सजा पाने के बाद सज्जन कुमार ने कांग्रेस से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा मिलने के एक दिन बाद मंगलवार को सज्जन कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिख पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। 34 साल की कानूनी लड़ाई के बाद आए इस फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सज्जन कुमार को दंगा भड़काने और साजिश रचने का दोषी पाया था। बीजेपी इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है। बीजेपी ने लगे हाथ एमपी के नवनियुक्त सीएम कमलनाथ पर भी सिख दंगे में शामिल होने का आरोप लगा उनसे इस्तीफा मांग रही है। मंगलवार को सज्जन कुमार ने राहुल गांधी को पत्र में लिखा कि उनके खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले के बाद वह पार्टी सदस्यता से तत्काल इस्तीफा देते हैं। आपको बता दें कि सिख दंगों के केस में निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। फैसले के खिलाफ सीबीआई ने हाई कोर्ट में अपील की, जिस पर सोमवार को फैसला आया। हाई कोर्ट ने सज्जन को 31 दिसंबर से पहले सरेंडर का आदेश भी दिया है।
हाई कोर्ट ने इस फैसले में 2002 के गोधरा बाद गुजरात दंगों और 2013 में उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर में हुए दंगों का भी जिक्र किया और कहा कि ये 1947 के बाद हुए बड़े नरसंहारों में शामिल हैं जिनमें अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। यह मामला साउथ-वेस्ट दिल्ली की पालम कॉलोनी के राजनगर इलाके में नवंबर 1984 को सिख परिवार के पांच सदस्यों की हत्या का है। कोर्ट ने माना कि आरोपी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर सुनवाई से बच निकले और सजा देने में तीन दशक की देरी हुई। जजों ने कहा कि पीड़ितों को भरोसा देना आवश्यक है कि कोर्ट के समक्ष चुनौतियों के बावजूद सत्य की जीत होगी, न्याय होगा।
सज्जन कुमार को सजा का ऐलान होते ही इसपर राजनीति शुरू हो गई। इस फैसले का असर कमलनाथ के शपथग्रहण पर भी पड़ा और बीजेपी ने एमपी सीएम पर इस दंगे में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उनका इस्तीफा भी मांग लिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सिख समुदाय कमलनाथ को हिंसा का दोषी मानता है। वहीं संबित पात्रा ने कहा कि यह आदेश सज्जन कुमार के खिलाफ नहीं बल्कि कांग्रेस के खिलाफ है। इसके बाद कांग्रेस का भी पलटवार सामने आया। कांग्रेस ने कहा कि इस फैसले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। कांग्रेस ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उसके शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं के नाम भी गुजरात दंगों में सामने आए थे।

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