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जूता फेंकने वालों को फारूक अब्दुल्ला ने लताड़ा

श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि वो किसी डरने वाले नहीं हैं। अगर कोई समझता है कि आजादी इस तरह से आएगी तो वो उनका कहना चाहते हैं कि पहले बेगारी, भूखमरी और बीमारी से आजादी पाओ। अब सवाल ये है कि आखिर उन्हें ये सब क्यों कहना पड़ा। दरअसल पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की श्रद्धांजलि सभा में उन्होंने भारत माता की जय और जय हिंद के नारे लगाए थे। फारुक अब्दुल्ला के उस बयान से नाराज कुछ लोगों ने ईद पर नमाज अता करने के दौरान उन पर जूता फेंक दिया। दरगाह में फारूक के साथ धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में लोगों को मस्जिद परिसर से फारूक को हटाए जाने की बात कहते हुए सुना जा सकता है। अब्दुल्ला वहां से जैसे ही जाने के लिए उठे, नारेबाजी कर रहे कुछ लोगों ने अपने जूते हाथ में ले लिए और ‘शर्म करो’, ‘शर्म करो’ और ‘आजादी’ के नारे लगाए।

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि आज समय की पुकार ये है कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति के माहौल में बातचीत होनी चाहिए। आज समय की पुकार ये है कि नफरत को एक किनारे किया जाए। ये देश, हिंदुओं, मुसलमानों, सिखों और ईसाईयों का है। यहां पर किसी खास विचारधारा को आगे बढ़ाकर हम आगे नहीं बढ़ सकते हैं। समाज के सभी लोगों और विचारधारा वाले समूहों को छोटी छोटी बातों से बचना चाहिए। आइए जानते हैं कि इस प्रार्थना सभा में फारूक ने पूर्व प्रधानमंत्री की प्रशंसा की थी। फारूक ने कहा था, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की हुकूमत ‘सभी के दिलों पर थी’। उन्होंने कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी इस बात को समझते थे कि कश्मीरियत को समझे बगैर घाटी में तनाव को कम नहीं किया जा सकता है। फारुक अब्दुल्ला ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी जी इस बात को समझते थे कि कश्मीर के मुद्दे पर कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत के दायरे में एक सर्वमान्य रास्ता निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ चुका है जब हम बड़े फलक पर सोचें ताकि एक ऐसी समस्या का रास्ता निकाल सकने में कामयाब हो सकें जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर का विकास रुका हुआ है।

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