2022 के ओंटारियो प्रांतीय चुनाव से ठीक एक साल पहले, प्रीमियर डग फोर्ड के प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स अभी भी पोल्स में बढ़त बनाए हुए हैं। लेकिन समर्थन में गिरावट ने प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स स्थिति को थोड़ा कमजोर कर दिया है।
ओंटेरियो में वोट के लिए 2 जून, 2022 की तारीख निर्धारित की गई है। प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स को आभारी होना चाहिए कि उन्हें जल्द ही मतदाताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि पिछले महीने हुए तीन सर्वे से पता चलता है कि पीसी के लिए समर्थन प्रभावित हुआ है।
प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स ने तीनों चुनावों में 33 से 36 प्रतिशत समर्थन के साथ लीड किया, जबकि लिबरल्स को 26 से 27 प्रतिशत तथा न्यू डेमोक्रेट्स को 25 और 28 प्रतिशत और ग्रीन्स को छह से नौ प्रतिशत के बीच समर्थन प्राप्त हुआ।
हालाँकि यह बढ़त कंजरवेटिव्स को राहत देने वाली हो सकती है लेकिन समस्या यह है कि ट्रेंड लाइन सही दिशा में नहीं जा रही है। सभी तीन चुनावों ने वर्ष में पहले किए गए सर्वे की तुलना में पीसी के समर्थन में गिरावट दर्ज की गई है। जानकारों का मानना है कि महामारी के चलते प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स के समर्थन में गिरावट आई है। महामारी की तीसरी लहर की शुरुआत से पहले पब्लिक हेल्थ और सेफ्टी से जुड़ी चिंताएं बढ़ी हैं वहीं इस दौरान अर्थव्यवस्था में भी भारी गिरावट आई है।
यह स्पष्ट है कि प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स के लेफ्ट मतदाताओं के एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाने की सबसे अधिक संभावना है। लेगर के अनुसार, अधिकांश लिबरल, एनडीपी और ग्रीन मतदाताओं का कहना है कि उनके मन बदलने की संभावना है; वे पीसी के बजाय उन पार्टियों में से किसी एक को अपनी दूसरी पसंद के रूप में लिस्ट करने की अधिक संभावना रखते हैं। वहीं इसके विपरीत अधिकांश पीसी मतदाता कहते हैं कि उनकी चॉइस अंतिम है।
समर्थन का ठोस आधार होना फोर्ड पीसी के लिए कोई बुरी बात नहीं है। वे अभी भी चुनाव में आगे हैं। लेकिन प्रांतीय समर्थन में मिड टू लो 30 पर्सेंट के फेर में फंसने से जहां अन्य पार्टियों में से किसी के लिए मौका बन सकता है वहीं प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स के लिए पिछड़ने व हार जाने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि इसी तरह की स्थिति का सामना प्रोग्रेसिव कंजरवेटिव्स को करना पड़ा था जब वे 2003, 2007, 2011 और 2014 के चुनाव हार गए थे।



