गिर में शेरों पर वायरस अटैक, 12 सितंबर से अबतक 21 की गई जान

राजकोट/अहमदाबाद गुजरात के गिर में एक के बाद कई शेरों की मौत ने वन प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। शेरों के लिए मशहूर गिर अभयारण्य में 20 सितंबर से अबतक कई शेरों की मौत हो गई है। सोमवार को वन विभाग ने जसाधर ऐनमल केयर सेंटर में 11 और शेरों की मौत की पुष्टि की है। इसके साथ ही अबतक कुल 21 शेरों की मौत हो गई है। कहा जा रहा है कि शेरों की मौत के पीछे एक खतरनाक वायरस है। इस वायरस के कारण तंजानिया में 1994 में 1000 शेरों की मौत हो गई थी। गिर में 12 सितंबर से शेरों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ था और अबतक मौतों का आंकड़ा बढ़कर 21 पहुंच तक चुका है। इससे पहले 12 से 19 सितंबर के दौरान डालखानिया रेंज में शावकों समेत 11 शेरों की मौत हुई थी। शेरों की मौत के कारण वन प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं।

शेरों की मौत को लेकर एक डरावना खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि 12 से 16 सितंबर के दौरान मरनेवाले 4 शेर कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) का शिकार थे। यह जानलेवा वायरस कुत्तों से जंगली जानवरों में फैलता है। यह वही वायरस है जिसने तंजानिया के सेरेंगेटी रिजर्व में 1994 के दौरान 1000 शेरों की जान लेकर पूरी दुनिया को हिला दिया था। गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणपत वासावा ने हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरॉलजी पुणे की शुरुआती रिपोर्ट में चार शेरों में घातक वायरस सीडीवी की पुष्टि हुई है। हम दूसरे शेरों में संभावित सीडीवी पाए जाने की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।’ वन विभाग ने सोमवार को बताया कि कुल 21 शेरों में से 6 की मौत प्रोटोजोआ इंफेक्शन और 4 की किसी वायरस के संक्रमण से हुई है। प्रोटोजोआ इंफेक्शन कुत्तों के शरीर पर पाए जाने वाले कीड़ों से जंगली जानवरों में फैलता है। इसके अलावा यह मवेशियों और घास में भी पाया जाता है। एहतियात के तौर पर वन विभाग ने सेमरडी इलाके के पास सरसिया से 31 शेरों को हटाकर जामवाला रेस्क्यू सेंटर में शिफ्ट किया है।

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