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एक और आवासीय स्कूल में मिली 600 से अधिक कब्रें

सस्केचवान (26 जून)। कैम्लूप्स स्कूल में मिली ढाई सौ से अधिक कब्रें मिलने के बाद अभी देश में फैला दहशत व ग़म का माहौल कम भी नहीं हुआ था कि अब एक और ऐसा ही मामला सामने आया है जिसमे एक आवासीय स्कूल में 600 से अधिक कब्र मिली हैं। कैनेडा के मूल निवासी नेताओं के ग्रुप्स ने बृहस्पतिवार को बताया कि जांचकर्ताओं को उनके समुदाय के बच्चों के लिए पूर्व में बने एक स्कूल में ये कब्रगाह मिली है। इस खबर के बाद पूरे प्रान्त में दहशत के साथ शोक का माहौल है। ये शव ‘मैरिएवल इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल’ से मिले, जो 1899 से 1997 तक चालू था जहां सस्केचेवान की राजधानी रेजिना से 135 किलोमीटर दूर काउसेस फर्स्ट नेशन स्थित है। काउसेस कैनेडा का एक मूल निवासी समुदाय है। काउसेस के प्रमुख कैडमस डेलोर्म ने बताया कि जमीन के अंदर की वस्तुओं का पता लगाने वाले रडार से मालूम चला है कि इलाके में कम से कम 600 शव दफन किए गए हैं। रडार के संचालकों ने बताया कि इसके नतीजों में 10 प्रतिशत का अंतर हो सकता है। डेलोर्म ने बताया कि तलाश जारी है और आने वाले हफ्तों में संख्याओं की पुष्टि की जाएगी। डेलोर्म ने बताया कि एक वक्त में कब्रों पर नाम लिखे गए थे लेकिन इस स्कूल का संचालन करने वाले रोमन कैथोलिक चर्च ने इन्हें हटा दिया था।
कैनेडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने टि्वटर पर कहा कि वह इस ताजा जानकारी से ‘‘बहुत ज्यादा दुखी’’ हैं। उन्होंने लिखा, ‘‘पूर्व मैरिएवल रेजीडेंशियल स्कूल में मूल निवासी समुदाय के बच्चों को दफन करने का पता चलने के बाद काउसेस फर्स्ट नेशन के लिए मेरा दिल बहुत दुखी है।’’ सस्केचेवान के प्रमुख स्कॉट मोए ने कहा कि इन कब्रों का पता चलने पर पूरा प्रांत शोकाकुल है। रेजिना के आर्कबिशप डोन बोलेन ने कहा कि दो साल पहले उन्होंने ‘‘पूर्व में गिरजाघर के लीडर्स की नाकामियों और पापों’’ के लिए काउसेस के लोगों से माफी मांगी थी। 80 वर्षीय फ्लोरेंस स्पारवियर ने कहा कि उन्होंने मैरिएवल इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल में पढ़ाई की थी। उन्होंने बताया कि नन का रवैया हमारे प्रति बहुत स्वार्थी था। स्कूल में नन हमारे लोगों की बहुत आलोचना करती थीं और इसका दर्द पीढ़ियों बाद भी दिखता है। बता दें कि पिछले महीने कैनेडा के दशकों पुराने स्कूल परिसर में 215 बच्चों के शव दफन पाए गए थे। इनमें तीन वर्ष तक के बच्चों के शवों के अवशेष भी शामिल थे। ये बच्चे ब्रिटिश कोलंबिया में 1978 में बंद हुए ‘कैम्लूप्स इंडियन रेजिडेंशियल’ स्कूल के छात्र थे। इन शवों का पता चलने के बाद पोप फ्रांसिस ने दुख जताया था और धार्मिक तथा राजनीतिक अधिकारियों से इस दुखद घटना का पता लगाने पर जोर दिया था।

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