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यूनेस्को ने गरबा को सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी

संयुक्त राष्ट्र ,०८ दिसंबर। यूनेस्को ने गुजरात के नृत्य गरबा को मानवता की एक अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएचएच) घोषित किया है, इसे विरासत में मिली जीवित अभिव्यक्ति के रूप में मान्यता दी है जो समावेशिता को बढ़ावा देती है और ‘शक्ति’ की स्त्री ऊर्जा का सम्मान करती है। अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए यूनेस्को की अंतर सरकारी समिति ने बुधवार को बोत्सवाना के कसाने में अपनी बैठक में गरबा को अपनी आईसीएचएच सूची में शामिल करने का निर्णय लिया।
यूनेस्को ने कहा कि बढ़ते वैश्वीकरण के सामने सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक महत्वपूर्ण कारक है और विभिन्न समुदायों की ओर से इसकी समझ अंतर-सांस्कृतिक संवाद और जीवन के अन्य तरीकों के लिए पारस्परिक सम्मान में मदद करती है। इसमें कहा गया है, दशकों से गरबा भारत और दुनिया भर में भारतीय प्रवासियों के बीच गुजराती संस्कृति का एक अभिन्न, बहुसंख्यक घटक रहा है। यूनेस्को ने कहा कि नवरात्रि उत्सव के नौ दिनों के दौरान गरबा किया जाता है जो स्त्री ऊर्जा या शक्ति की पूजा के लिए समर्पित है।
नई दिल्ली में यूनेस्को के क्षेत्रीय कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस ने कहा, मुझे उम्मीद है कि यह इस परंपरा की व्यवहार्यता सुनिश्चित करने में मदद करेगा और समुदाय, विशेष रूप से युवाओं को गरबा से जुड़े ज्ञान, कौशल और मौखिक परंपराओं को जारी रखने के लिए प्रेरित करेगा।

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