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“प्रभूतंकार्यमल्पंवातन्नरः कर्तुमिच्छति। सर्वारंभेणतत्कार्यं सिंहादेकंप्रचक्षते॥”

अर्थात् – हमें लक्ष्य प्राप्ति हेतु, लक्ष्य पर ध्यान लगाकर कठिन परिश्रम से यत्न करना चाहिए।

 

“स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम्।
परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते ।।”

अर्थात् – जिसके जन्म से कुल की उन्नति होती है, उसका ही जन्म सफल होता है।

अन्यथा तो इस परिवर्तनशील दुनिया में सब जन्म लेते हैं और सब मरते हैं।

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