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संत शिरोमणि जैन आचार्य १०८ पूज्य श्री विद्यासागरजी महा मुनिराज की समता पूर्वक समाधि

 विश्व जैन संगठन ने दी भावपूर्ण विनयांजलि

ब्रैम्पटन। संत शिरोमणि और दिगंबर जैन धर्म के महान मुनि आचार्यश्री विद्या सागर महाराज जी ने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरि तीर्थ में शनिवार १७•०२•२०२४ देर रात २:३५ बजे अपना शरीर त्याग दिया । वह ७८ वर्ष के थे ।आचार्यश्री ने ३ दि न पहले ही समाधि मरण की प्रक्रिया को शुरू कर पूर्ण रूप से अन्न-जल का त्याग कर दिया था और अखंड मौन व्रत ले लिया था । उनके शरीर त्यागने का पता चलते ही जैन समाज के लोगों का जुटना शुरू हो गया ।
श्री चंद्रगिरि तीर्थ, डोंगरगढ़ में समाधिष्ठ परमपूज्य आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज का अंतिम डोला १८ फरवरी रविवार को दोपहर १ बजे
निकाला गया और उनकी देह अग्नि संस्कार के माध्यम से पंचतत्व में विलीन हो गई।
उनका जन्म १० अक्टूबर १९४६ को विद्या धर के रूप में कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा में शरद पूर्णिमा के दिन हुआ था । आचार्यश्री ने आम जनता के कल्या ण के लि ए महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने गरीबों से लेकर जेल के बंदियों के लिए भी काम किया । लोगों में आध्यात्मिक जागृति के लिए अपने प्रयासों के लिए भी वह हमेशा स्मरण किए जाएंगे। उन्होंने हिंदी और संस्कृत में अनेक ग्रंथों की रचना की ।
जो त्याग आचार्यश्री ने किए हैं, वे न केवल जैनधर्म अपितु सम्पूर्ण मानव इतिहास में अद्वितीय हैं। आचार्यश्री न केवल जैन समाज बल्कि सम्पूर्ण
विश्व के लोगों द्वारा पूजे जाते हैं। समय-समय पर देश-विदेश के बड़े-बड़े नेता और राजनेता उन के दर्शन करने को जाते रहते थे। भारत से गणमान्य
व्यक्तियों ने आचार्यश्री के देहत्याग पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने भाजपा अधिवेशन में ‘वर्तमान के महावीर’ कहलाने वाले आचार्यश्री को स्मरण करते हुये श्रद्धांजलि अर्पित की । प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में आचार्य श्री के कठोर तप और सामाजिक उत्थान में उनके योगदान का विशेष उल्लेख किया ।
कैनेडा के स्थानीय श्री जैन मंदिर, टोरंटो में श्रद्धालू और विश्व जैन संगठन कैनेडा ने मिलकर प्रातः वंदनीय, मूकमाटी रचयिता , महान तपस्वी ,
ज्ञानी , शांतमुद्रा , अनेक जैन बालिका विद्यालयों के प्रेरक, शाकाहारी पद्धति से कुटीर उद्योग के प्रणेता , गोशाला प्रवर्तक, “इंडिया नहीं भारत बोलो “
समर्थक, आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज को स्मरण करते हुये भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की ।

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