वाशिंगटन: 28 साल बाद अमेरिकी प्रांत अलबामा में स्कूलों में योग पर लगा प्रतिबंध हटने की तैयारी हो रही है। अलाबामा हाउस ऑफ रिप्रेजेंटिव्स ने इसके संबंध में बिल को मंंजूरी भी दे दी है। 12 मार्च को सदन में ये बिल 73-25 वोट के साथ पास हो गया। इसमें स्कूल ही फैसला लेंगे कि उन्हें योग शिक्षा को कोर्स में शामिल करना है या नहीं। इसी के साथ बिल में ये भी कहा गया कि मंत्रों के उच्चारण और ‘नमस्ते’ कहनेे पर अभी भी प्रतिबंधित बना रहेगा। लोकल स्कूल बोर्ड्स को इससे जुड़ी क्लास की समय सीमा व फ्रीक्वेंसी तय करनी होगी। बताया जा रहा है कि इस बिल को डेमोक्रेटिक रिप्रजेंटेटिव के जेरेमी ग्रे ने स्पॉन्सर किया था। योग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि मैं 7 साल से योग कर रहा हूँ। मुझे इसके फायदे पता हैं। ग्रे का कहना है कि कुछ शिक्षक वैसे भी योग करवाते हैं बिना ये समझे कि योग बैन है। बाकी भी इसकी शिक्षा देना चाहते हैं। इस बिल के अनुसार योग आसन के नाम अंग्रेजी में पढ़ाए जाएँगे। ग्रे ने कहा, “कुछ सदस्यों को कई ईमेल आए कि योग हिंदुत्व का हिस्सा है। लेकिन वह (ग्रे) कहते हैं कि कुछ लोगों का दिमाग कभी नहीं बदल सकता। अब इसके बारे में और अधिक बात करें तो अलबामा बोर्ड ऑफ एजुकेशन ने पब्लिक स्कूल क्लासरूम में 1993 में योग बैन करने को कहा था। इस प्रतिबंध के पीछे कन्जर्वेटिव ग्रुप्स का हाथ भी माना जाता है। जिन लोगों ने सदन में योग के ख़िलाफ़ वोट दिया, उनके लिए ग्रे कहते हैं कि उन्हें ये देखकर लगता है कि कइयों को योग के बारे में गलत बताया गया है।



