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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुंबई में पहली गे मैरेज पार्टी

मुंबई। लगभग पांच महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी के बाहर कर दिया था। इस फैसले के बाद मुंबई में पहली गे मैरेज पार्टी आयोजित हुई है। यह शादी रेनबो वॉइस मुंबई के फाउंडर विनोद फिलिप (43) और फ्रांस के उनके दोस्त विन्सेंट (47) की थी। दोनों ने विवाह के बाद मुंबई के एक होटेल में रिसेप्शन पार्टी आयोजित की थी। दोनों की शादी के इस रिसेप्शन में न केवल उनके मेहमान और परिवारवाले शामिल हुए बल्कि होटलवाले भी उनकी इस खुशी का हिस्सा बने। दोनों ने किसी आशंका के डर से होटलवालों को आखिरी मिनट तक अंधेरे में रखा था कि यह एक ही सेक्स वालों की शादी की पार्टी है। हालांकि जब होटेल मैनेजमेंट को इसकी जानकारी हुई तो उन्हें भी खुशी हुई। उन लोगों ने इस जोड़े के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया और इस शादी को यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दादर की एक बेकरी में भी जब इस कपल ने संपर्क किया तो उन्होंने भी उनके साथ कोई पूर्वाग्रह नहीं दिखाया। बेकरी की मालिक नेहा बंदिवाडेकर ने इसे उत्सव का हिस्सा बनने को सम्मान के रूप में देखा। उन्होंने कहा, ‘शादी का समारोह प्रेम का उत्सव है। हम इसे सेक्स से जोड़कर नहीं देख सकते। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में भी इसी तरह दूसरी समलैंगिक शादियों के कपल की हेल्प कर सकूंगी।’
इस जोड़े ने पिछले साल दिसंबर में फ्रांस में शादी की लेकिन फिलिप का मुंबई से अटूट लगाव है। 2014 में उन्होंने चेन्नै से यहां आकर एलजीबीटी समुदाय के लिए काम करने की शुरुआत की और उन्हें यहां से नई पहचान मिली। मुंबई शहर से इसी लगाव के कारण उन्होंने यहां पर शादी का समारोह रखा। पेरिस में रहने वाले फिलिप ने कहा, ‘मैं मुंबई में रहता था, और यहां की एनजीओ हमसफर ट्रस्ट (जो कि एलजीबीटी अधिकारों को बढ़ावा देता है) ने उन्हें हमेशा प्रोत्साहित किया। इस एनजीओ के माध्यम से मैं आखिरकार चेन्नै में अपने परिवार और दोस्तों से बाहर निकलकर आया।’ फिलिप ने बताया कि वह एक बहुत ही रुढ़िवादी ईसाई परिवार के थे। पहले उनके फैसले से सब सदमे और आश्चर्य में थे लेकिन उनके माता-पिता की अंतिम स्वीकृति ने उनके सभी पूर्वाग्रह को खत्म कर दिया। उनके परिवार ने धार्मिक मूल्यों की परवाह न करते हुए उनके बारे में सोचा। फिलिप ने बताया कि विनसेट से उनकी मुलाकात 2016 में पेरिस के एक शहर में हुई। उन्होंने एक डेटिंग ऐप के जरिए एक-दूसरे को पाया। दोनों चैटिंग करने लगे और फिर बिना किसी परवाह किए एक दूसरे के साथ डेट पर जाते। छह महीने बाद दोनों ने एक साथ छुट्टियां लीं और साथ में रहने लगे। बाद में जब दोनों अलग-अलग काम पर गए तो उन्हें एहसास हुआ कि वे एक दूसरे से कितना प्यार करते हैं। उन्होंने शादी करने का फैसला लिया। विन्सेंट, फिलिप के परिवार से मिलने भारत आए। यहां फिलिप के परिवार ने उनका गर्गजोशी से स्वागत किया। विन्सेंट को फिलिप के परिवार से मिलकर बहुत अच्छा लगा। उन्हें फिलिप के घर में अपने परिवार जैसा एहसास हुआ। दोनों ने वापस जाकर दिसंबर 2018 में शादी कर ली। यह पूछने पर कि उन्होंने मुंबई के इसी होटल को आयोजन के लिए क्यों चुना तो फिलिप ने कहा कि वह सालों पहले भांडुप में रहने के दौरान अक्सर इसी होटल में आया करते थे। यहां वे हैंगआउट करते थे। हमसफर ट्रस्ट के संस्थापक अशोक का कहना है कि उन्होंने 1984 में पहली बार समलैंगिक शादी की मेजबानी की थी, जो अनाधिकारिक था। आज इस बदलाव के लिए वह बहुत खुश हैं।

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