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‘सुपरमॉम कॉलरवाली’ बाघिन ने बनाया रेकॉर्ड, MP-राजस्थान के टाइगर रिजर्व में अच्छे दिनों के संकेत

सिवनी। मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व में कुछ दिन पहले एक बाघिन ने चार नए शावकों को जन्म दिया। आठवीं बार मां बनने के साथ ही सुपरमॉम कॉलरवाली बाघिन के शावकों की कुल संख्या 30 पहुंच गई, जो अपने आप में एक रेकॉर्ड है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान के टाइगर रिजर्व के लिए एक और अच्छी खबर सामने आई है। 2010-11 में की गई एक अंतरराष्ट्रीय रीसर्च के नतीजे सामने आए हैं जिनके मुताबिक इन राज्यों में टाइगर रिजर्व ‘बहुत अच्छी’ और ‘संतोषजनक’ स्थिति में हैं। दोनों राज्यों के लिए यह एक अच्छी खबर इसलिए है क्योंकि 2005-08 के दौरान यहां से बाघों का निशान लगभग मिट गया था।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आसपास के संरक्षित इलाकों से बाघ लाकर रखे गए। कई सालों की मेहनत के बाद 2010-11 में रीसर्च कराई गई और सोमवार को दुनियाभर के 13 देशों में जारी व्यापक ग्लोबल टाइगर ऐक्शन प्लान के तहत रीसर्च के नतीजे पेश किए गए। ऐक्शन प्लान का उद्देश्य 2010 की संख्या के मुकाबले बाघों की संख्या 2022 तक दोगुनी करने का है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के मानकों के मुताबिक 15 (38%) टाइगर रिजर्व बहुत अच्छी कैटिगरी में थे, 12 (31%) अच्छी कैटिगरी, 8 (21%) संतोषजनक कैटिगरी और 4 (10%) खराब कैटिगरी में रहे। बहुत अच्छी कैटिगरी में अन्नामलाई, बांधवगढ़, पेंच, पिरायर, काजीरंगा, कान्हा, सतपुड़ा और सुंदरबन टाइगर रिजर्व रहे। हालांकि, पिछले कुछ महीनों में 28 बाघों को खोने वाले मध्य प्रदेश में चिंता की स्थिति बन गई है। इसलिए, रविवार को पेंच में जब कॉलरवाली को चार नए शावकों के साथ देखा गया तो अधिकारियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपने रेडियो कॉलर की वजह से बाघिन को यह नाम मिला है और अब उसे सुपरमॉम भी कहा जाता है। उसे पेंच की रानी और राजकुमारी भी कहा जाने लगा है। कॉलरवाली की मां बरीमदा भी स्पाई इन द जंगल नाम की डॉक्युमेंटरी में दिखने के बाद मशहूर हो गई थी। वह अपनी मां के चार शावकों में से अपनी मां की ही रेंज में अपना एकाधिकार बनाने वाले पहली शावक थी। कॉलरवाली ने पहली बार मई 2008 में तीन बच्चे दिए थे लेकिन मौसम से वह अपने बच्चे बचा नहीं पाई और 24 दिन के अंदर तीनों की मौत हो गई। एक्सपर्ट्स का दावा है कि कॉलरवाली 13 अलग-अलग जगहों पर बच्चे दे चुकी है और वह ज्यादातर गुफाओं को चुनती है। 2008 से 2013 के बीच उसने 18 बच्चे दिए जिनमें से 14 बचे हैं। बता दें कि पेंच में अब 60 बाघ हैं। यहां से एक बाघ को पन्ना टाइगर रिजर्व भी ले जाया गया और वहां भी इंट्रोडक्शन प्रोग्राम शुरू किया गया। पन्ना में अवैध शिकार और दूसरे कारणों से बाघों की संख्या भले ही कम हो, रीइंट्रोडक्शन के मामले में इसे मिसाल माना जाता है। यहां करीब 25 बाघ हैं।

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