श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में गुरुवार शाम हुए एक बड़े आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 39 जवान शहीद हो गए। शहीद जवानों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उरी में सितंबर 2016 में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीर में यह सुरक्षाबलों पर अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। गुरुवार को श्रीनगर-जम्मू हाइवे पर स्थित अवंतिपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ के एक काफिले को निशाना बनाया। इस हमले के बाद दक्षिण कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अलर्ट जारी किए गए हैं।
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। बताया जा रहा है कि आदिल अहमद डार नाम के आतंकी ने इस काफिले पर हमले की साजिश रची थी। आदिल पुलवामा के काकापोरा इलाके का रहने वाला है। सीआरपीएफ की 54वीं बटैलियन के जवानों को इस हमले में आतंकियों ने निशाना बनाया।
जानकारी के अनुसार, विस्फोटकों एक गाड़ी लेकर आए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आदिल ने सीआरपीएफ जवानों के काफिले की बस में टक्कर मार दी। बताया जा रहा है कि काफिले की जिस बस को आतंकियों ने निशाना बनाया, उसमें 39 जवान सवार थे। आत्मघाती हमलावर आदिल 2018 में जैश में शामिल हुआ था। हमले के बाद जवानों को तुरंत श्रीनगर के हॉस्पिटल में शिफ्ट करने का काम शुरू किया गया। दर्जनों घायल जवानों को अस्पताल में कराकर उनका इलाज किया जा रहा है। इनमें से कई जवानों की हालत बताई जा रही है। जिस काफिले पर यह हमला हुआ, वह जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था और इसमें 2 हजार से अधिक जवान शामिल थे। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सीआरपीएफ के जिस काफिले पर हमला किया गया, उसमें 70 वाहन शामिल थे। इन्हीं में से एक गाड़ी आतंकियों के निशाने पर थी। सीआरपीएफ जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर आ रहा था। हमले के बारे में सीआरपीएफ के आईजी जुल्फिकार हसन ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस जांच कर रही है। घायल जवानों को अस्पताल शिफ्ट किया गया है और विस्फोट स्थल पर छानबीन की जा रही है।
इस हमले की जानकारी मिलने के बाद तत्काल पुलवामा में मौजूद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की अन्य कंपनियों को अवंतिपोरा गया। आतंकी वारदात के बाद सेना ने फिलहाल जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर ट्रैफिक बंद करते हुए अवंतिपोरा और आसपास के इलाकों में बड़ा सर्च आॅपरेशन शुरू किया है। इसके अलावा पुलवामा, शोपियां, कुलगाम और श्रीनगर जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। हमले में घायल जवानों का इलाज जारी है और एजेंसियों के अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।



