टोरंटो। रोजरस कम्युनिकेशनस द्वारा प्रस्तावित डील के अनुसार शॉ कम्युनिकेशनस को खरीदने में पेच फंसता नजर आ रहा है। अब शॉ कम्युनिकेशनस की खरीदारी के लिए मूल्यों का निर्धारण कैसे किया गया, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इसके पीछे सियासी हलचल मानी जा रही है। कैनेडा रिसर्च चैयर का दावा है कि इस डील के अंतर्गत इंटरनेट और ईकॉमर्स लॉ को भी अनदेखा किया गया हैं, जोकि किसी भी वायरलेस कंपनी की अधिग्रहण डील के लिए आवश्यक होता हैं। वहीं अर्थशास्त्रियों की ओर से भी सवाल खड़े करते हुए संदेह जताया जा रहा है। अब मांग उठ रही है कि इसकी जांच होनी चाहिए रॉजरस द्वारा शॉ का अधिग्रहण करने के पीछे की आशा अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई हैं। रोजरस के अनुसार इस डील की प्रस्तावना को हुए लगभग तीन वर्ष बीत चुके हैं परंतु इसके मूल्य निर्धारण में कोइ्र भी परिवर्तन नहीं किया गया और जितना मूल्य तीन वर्ष पूर्व निर्धारित किया गया था उतनी ही राशि आज भी सुनिश्चित की गई हैं। इसके अलावा रोजरस द्वारा शॉ के निवेशकों को यह भी समझाया जा रहा है कि इस डील में कोई भी परिवर्तन नहीं किया जाएगा जिससे निवेशकों के लाभ को कोई भी हानि न पहुंच सके।



