‘द हिंदू’ मीडिया समूह के चेयरमैन एन. राम आजकल सुर्खियों में बने हुए हैं. रफ़ाल सौदे को लेकर हाल के दिनों में ‘द हिंदू’ में उनके कई लेख छपे थे, जिसे लेकर वो एकाएक सुर्खियों में आ गए.
एन.राम ने रफ़ाल सौदे के बारे में खोजी लेखों की एक सिरीज़ लिखी है. इनमें से एक लेख में यह दावा किया गया है कि फ्रांस की दासौ एविएशन कंपनी से रफ़ाल लड़ाकू जेट ख़रीदने के लिए जो सौदा हुआ वो 2007 की क़ीमत से चालीस फ़ीसदी अधिक क़ीमत पर हुआ था और यह साल 2012 की तय क़ीमत से 14 फ़ीसदी अधिक है.
इस सप्ताह की शुरुआत में नरेंद्र मोदी सरकार ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल के जरिए सुप्रीम कोर्ट को बताया कि रफाल सौदे से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ रक्षा मंत्रालय से चोरी हो गए हैं. इसके साथ ही अटॉर्नी जनरल ने चेताते हुए कहा कि इन दस्तावेज़ों का उपयोग और प्रकाशन गोपनीयता के कानून के तहत दंडनीय अपराध है.
इसके बाद अटॉर्नी जनरल ने शुक्रवार को दावा किया कि रफाल दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चुराए नहीं गए और अदालत में उनकी बात का मतलब यह था कि याचिकाकर्ताओं ने आवेदन में उन ‘मूल कागजात की फोटोकॉपियों’ का इस्तेमाल किया, जिसे सरकार ने गोपनीय माना है.
हालांकि उनका गोपनीयता कानून के तहत जांच करने की बात कहना द हिंदू जैसे समाचार संगठन के लिए एक चेतावनी की तरह था, जिन्होंने रफाल सौदे पर बातचीत और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पर सिलसिलेवार कई लेख प्रकाशित किए हैं.
द वायर से बात करते हुए द हिंदू के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार एन. राम ने इस सौदे की जांच में इन गोपनीय दस्तावेज़ों की भूमिका और इस तरह की खोजी पत्रकारिता पर सरकार के दबाव पर बातचीत की.
हालांकि शुक्रवार को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि रफ़ाल सौदे से जुड़ी फ़ाइलें रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुई हैं.
उन्होंने ट्वीट किया “अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया है कि रफ़ाल सौदे से जुड़े दस्तावेज़ चोरी नहीं हुए हैं. उन्होंने जो कुछ कोर्ट में कहा उसका मतलब था कि पिटीशनर ने अपनी अर्ज़ी में असल दस्तावेज़ की फ़ोटोकॉपी इस्तेमाल की थी जिन्हें सरकार ख़ुफ़िया दस्तावेज़ मानती है.”



