बर्दाश्त नहीं हुआ अमरनाथ यात्रा पर कांग्रेस अध्यक्ष का अपमान, संन्यासी ने खोली ‘राहुल गांधी कैंटीन’

उन्नाव कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की शिवभक्ति पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने भले ही विश्वास न किया हो लेकिन कुछ लोगों ने न सिर्फ उसे सच माना है बल्कि राहुल को इस नाते अपना भाई तक मान लिया है। उन्नाव से रायबरेली जाने के रास्ते में सड़क के किनारे चल रही ‘राहुल गांधी’ कैंटीन ऐसी ही एक बानगी है जिसे एक संन्यासी बाबा चला रहे हैं। वह इस कैंटीन में गरीबों को मुफ्त में खाना खिलाते हैं। जो लोग इच्छा से पैसे देना चाहते हैं, वही देते हैं। वह बताते हैं कि करीब 150 लोग उनकी कैंटीन में हर रोज खाना खाते हैं। राजू बाबा नाम के शिवभक्त ने तीन हफ्ते पहले यह कैंटीन शुरू की थी। वह खुद को जूना अखाड़े का नागा साधु बताते हैं। इस कैंटीन का नाम राहुल गांधी के नाम पर कैसे पड़ा, इस बारे में वह बताते हैं- ‘हम शिव भक्त हैं। राहुल गांधी भी शिवभक्त हैं, तो हम गुरु भाई हुए। भगवान दूसरों के माध्यम से काम-काज करते हैं। आज के युग में राहुल गांधी की बात ठीक है, सबको मिल-जुलकर रहना चाहिए और मिल-बांटकर खाना चाहिए।’

उन्होंने बताया कि वह अमरनाथ यात्रा और कैलास मानसरोवर को जाने वाले लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं। उन्होंने बताया, ‘मैंने राहुल गांधी के लिए भी प्रार्थना की लेकिन विपक्ष ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। मुझे बुरा लगा और राहुल के लिए भाईचारे की भावना जागी। मुझे लगा कि एक मुफ्त कैंटीन शुरू करनी चाहिए।’ राजू बाबा का कहना है कि देश सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। ऐसा वक्त 40 साल से नहीं आया था। उन्होंने कहा, ‘यह सब अच्छे दिन के सपनों के साथ चार साल पहले शुरू हुआ लेकिन अच्छे दिन तो भूल जाइए, जिंदगी की गुणवत्ता खराब हो गई है। लोग संपत्ति बेचकर जीवन बिता रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि 6 साल पहले उनके गांव में 8000 लोग थे लेकिन नौकरी की कमी की वजह से परिवार पलायन करने लगे हैं। घर के बड़े पीछे छूट गए हैं। उनमें से कुछ को वह मुफ्त में खाना खिलाते हैं। उन्नाव से पूर्व कांग्रेस सांसद अनु टंडन ने भी राहुल गांधी कैंटीन के ब्रेड पकौड़े बुकनू संग खाए। उन्होंने बताया कि कैंटीन का नाम देख उनसे बिना रुके नहीं रहा गया। संन्यासी बाबा ने उन्हें बताया कि उनके गांव को अच्छे दिन के नाम पर ठगा गया। कई लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। इसलिए उन्होंने फ्री कैंटीन चलाने का फैसला किया।

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