मुम्बई। बॉलीवुड ऐक्टर और पप्पू पॉलिएस्टर के नाम से मशहूर सैयद बद्र उल हसन का निधन हो गया है। रॉयल फैमिली से रिश्ता रखने वाले सैयद बद्र उल हसन ने यूं तो फिल्म और टीवी में कई रोल किए लेकिन आज भी लोग उन्हें नंदी भगवान के रूप में याद करते हैं। ओम नम: शिवाय सीरियल में नंदी के किरदार को जीवंत बनाने वाले पप्पू पॉलिएस्टर ने मंगलवार की दोपहर इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। लखनऊ के गोलागंज और नक्खास की गलियों में पले-बढ़े सैयद बद्र उल हसन खान बहादुर उर्फ पप्पू पॉलिएस्टर का ताल्लुक नवाब अमजद अली शाह की चौथी पीढ़ी से था। यही वजह थी कि जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में जाने का फैसला किया तो पूरा खानदान खफा हो गया था। इसके बावजूद पप्पू पॉलिस्टर ने दिल की सुनी और 150 किलो वजन के साथ उन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाई। टीपू सुल्तान में मैसूर के महाराजा के रूप में उनको बहुत सराहा गया था। ‘जोधा-अकबर’, ‘फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी’, ‘मन’, ‘तेरे मेरे सपने’ जैसी फिल्मों के अलावा कई विज्ञापनों व सीरियल्स में भी काम किया है।
बेटे के साथ अकेली रह गईं पत्नी तबस्सुम कहती हैं कि पांच दिन से वह अंधेरी के अस्पताल में भर्ती थे। हार्ट अटैक आया और तबीयत बिगड़ती ही गई। सोमवार रात को उन्होंने मुझसे चंद बातें कीं क्योंकि उसके बाद वह वेंटिलेटर पर चले गए थे। वह मुझसे पूछ रहे थे कि यह वेंटिलेटर कब हटेगा, मुझे परेशानी हो रही है। मंगलवार को जैसे ही डॉक्टर ने वेंटिलेटर से उन्हें हटाने की कोशिश की उनकी सांसे रुक गईं। मुंबई में ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सैयद बद्र उल हसन की पत्नी ने बताया कि उनके जाने के साथ लखनऊ में फिल्म बनाने की उनकी ख्वाहिश अधूरी रह गई। जब सैयद लखनऊ से आते थे तो बस फिल्म की ही बात करते थे। वह जब पढ़ाई के लिए लंदन गए थे, तब उन्हें फिल्मों का शौक चढ़ा था। शाही परिवार के थे इसलिए सब फिल्मी दुनिया को बुरा भला कहते थे। सबका यही कहना था कि अगर फिल्मी दुनिया में गए तो हमसे कोई रिश्ता नही रखना लेकिन उन्होंने जिन्दगी अपनी मर्जी से जी। वह बेटे को भी फिल्मी दुनिया में देखना चाहते थे।



