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पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के साथ ‘ट्रैक II’ की पहल ठंडे बस्ते में, युवाओं के बीच होना था संवाद

नई दिल्ली। पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाक संबंधों को पटरी पर आने से पहले ही एक बार फिर से बुरी तरह बिगड़ दिया है। दोनों देशों के बीच 2016 में हुए उरी अटैक के बाद से ही संबंध खराब चल रहे थे। इस बीच भारत सरकार ने ‘ट्रैक II’ योजना के तहत पाकिस्तान से संबंधों को आगे बढ़ाने का विचार किया था, लेकिन पुलवामा अटैक में 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बाद यह ठंडे बस्ते में चली गई है। सरकार ने इस प्रस्ताव से अब हाथ खींच लिए हैं। इसके तहत दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की योजना थी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक यह अपनी तरह की पहली ऐसी योजना होती, जिसमें भारत और पाकिस्तान के युवाओं के बीच आधिकारिक तौर पर संवाद को मंजूरी दी जाती।
एक सूत्र ने बताया, ‘इसके पीछे आइडिया यह था कि युवाओं के दिमाग में ऐतिहासिक तथ्यों का बहुत ज्यादा दबाव नहीं होता है। वे ज्यादा शांति और विकास को महत्व देते हैं। अब इसके लिए इंतजार करना होगा।’ इस्लामाबाद स्थित एक थिंकटैंक को भारत से 7-8 मार्च को जाने वाले थिंकटैंक की मेजबानी करनी थी। भारतीय विदेश मंत्रालय और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से इस संबंध में मंजूरी दिए जाने के बाद इस डायलॉग समिट का आयोजन किया जाना था। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से भारत और पाकिस्तान सरकार करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोले जाने की पहल के साथ ही धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटे थे। लेकिन जैश-ए-मोहम्मद की ओर से खुद आतंकी हमले की जिम्मेदारी लिए जाने के बाद भी पाक की ओर से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार के बाद भारत ने वार्ता की पहल को स्थगित कर दिया है।

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