पीएम मोदी के २० लाख करोड़ के पैकेज से मज़दूरों को राहत की कतई उम्मीद नहीं, बोले – ऐलान तो होते रहते हैं, हमें खाना भी नसीब नहीं। ये सब लाखों करोड़ लोग बीच में खा जाएँगे। मज़दूरों ने कहा की हम लोग घर जाना चाहते हैं. ट्रेन चलाएं तो चलाएं वरना पैदल चले जाएंगे. हम मरेंगे तो घर पर ही मरेंगे.’एक महिला मजदूर से जब पीएम मोदी के पैकेज के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इससे खुश क्या होंगे? काम ही नहीं चल रहा तो खुश क्या होंगे. मेहनत-मजदूरी करते हैं. रोजगार है नहीं. कोई काम मिल नहीं रहा तो खाएंगे क्या? इससे अच्छा गांव में जाकर कुछ छोटा-मोटा काम कर लेंगे. इससे कोई फायदा नहीं होगा. हमें राशन ही नहीं मिल रहा है.


