जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद ने एक बेहद कायराना हरकत को अंजाम देते हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया जिसमें 37 जवान शहीद हो गए। जानकारों का कहना है कि जैश घाटी में दोबारा संगठित हो रहा है और यह हमला उसी का ऐलान था। जैश के इरादों की मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके संस्थापक मसूद अजहर के भाई अब्दुल राउफ असगर ने पाकिस्तान के पंजाब में खड़े होकर कुछ दिन पहले ही धमकी दे दी थी कि आतंकी अफजल गुरु की फांसी का बदला जल्द ही लिया जाएगा। आखिरकार, सीआरपीएफ के ये जवान जैश के नापाक मंसूबों की भेंट चढ़ गए। आंकड़ों पर नजर डालें तो गुरुवार को हुआ हमला मई 2002 में जम्मू के कालूचक आर्मी कैंट में हुए हमले से भी भयानक था। उस वक्त 36 जवान शहीद हुए थे। हालांकि, दोनों ही हमलों में एक समानता थी- हमले का पैटर्न। एक फिदायीन, जो कि विदेशी नहीं बल्कि स्थानीय लड़का था, उसने सुरक्षाबलों को भारी नुकसान पहुंचाया। इस बार यह शख्स था आदिल अहमद डार। वह पुलवामा के काकापोरा गांव का रहने वाला है। कश्मीर में सुरक्षा अधिकारियों का अंदाजा है कि जैश के पास दक्षिण कश्मीर में 40 जिहादी हैं। पूरी घाटी में ISI जैश को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रही है। एक डिफेंस अधिकारी ने बताया, ‘यह ध्यान देने वाली बात है कि 1990 में जब सशस्त्र उग्रवाद शुरू हुआ तो अजहर हरकत-उल-मुजाहिदीन का हिस्सा था और घाटी में बेहद सक्रिय था। 2017 में जैश के सबसे पुराने आतंकी नूर त्राली को मारकर एक बड़ी कामयाबी हासिल की गई थी।’ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल ध्यान सिर्फ इस बात पर है कि कैसे स्थानीय युवाओं को जैश में जाने से रोका जाए। कोशिश है कि जैश को कश्मीरी युवाओं को सूइसाइड बॉम्बर में तब्दील करने से रोका जा सके।



