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एजेंसी ISI के चीफ असीम मुनीर की भी भूमिका!

नई दिल्ली। पुलवामा में हुए आत्मघाती आतंकी हमले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के नए चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल असीम मुनीर की छाप भी देखने को मिल रही है। ISI के काम करने के तरीकों से वाकिफ लोगों ने बताया कि मुनीर ISI चीफ बनने से पहले नॉर्दन एरिया के कमांडर और मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल थे। जम्मू-कश्मीर के बारे में उन्हें अच्छी जानकारी है। उन्होंने बताया कि मुनीर की नियुक्ति पाकिस्तानी सेना के चीफ कमर जावेद बाजवा ने की है। नियुक्ति के बाद से ही वह खुद को साबित करने के लिए एक मौके की तलाश में थे।
पाकिस्तान समर्थक आतंकी ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। ISI को इस संगठन के जरिए घाटी में हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने के लिए जाना जाता है। पुलवामा हमले की छानबीन से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि ISI फरवरी के पहले हफ्ते में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के एक साल पूरा होने पर हमला करवाना चाहता था। हालांकि, बेहतर तैयारी की खातिर इसे टाल दिया गया। पूर्व कैबिनेट सेक्रटरी और पाकिस्तान पर दो किताबों के लेखक तिलक देवशेर ने बताया, ‘यह सुनियोजित हमला था, जिसे केवल सावधानीपूर्वक योजना और ट्रेनिंग के जरिए ही अंजाम दिया जा सकता था। इसमें कोई शक नहीं है कि इस हमले में नए ISI चीफ की भूमिका है।’ उन्होंने कहा, ‘हमले के जरिए मुनीर ने बॉस की नजरों में खुद को साबित किया है। नॉर्दन एरिया के कमांडर होने के नाते वह कश्मीर से अच्छी तरह वाकिफ थे। इसलिए वह आसानी से इस हमले की योजना बना सके।’ सूत्रों ने बताया कि इमरान खान की सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही जैश-ए-मोहम्मद को काफी मदद मिल रही है। पाकिस्तान में पिछले साल चुनावों से पहले जैश ने नवाज शरीफ के खिलाफ अभियान चलाते हुए उन्हें पाकिस्तान और इस्लाम का गद्दार बताया था। पंजाब के कई इलाकों में जैश ने इमरान खान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के पक्ष में अभियान चलाए थे। सूत्रों के मुताबिक चुनावों के बाद से ही जैश के नेटवर्क और फाइनेंस पाकिस्तान में तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें उसकी रियल एस्टेट संपत्तियां भी शामिल हैं।
जैश ने लश्कर-ए-तैयबा जैसे दूसरे आतंकी समूहों के साथ भी गठबंधन किया हुआ है। अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाकिस्तान ने 2002 में इस संगठन को बैन कर दिया था। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह संगठन अभी भी खुलेआम अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। विश्लेषकों ने बताया कि पिछले साल चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी को हराने के लिए पाकिस्तानी सेना ने दोनों- जैश और लश्कर-ए-तैयबा संगठनों का इस्तेमाल किया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 2001 में अलकायदा को फाइनेंस करने, मदद पहुंचाने, उसकी योजना और हमलों में शामिल होने के आरोपों में जैश को ब्लैकलिस्ट किया था।

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