जम्मू। पुलवामा आतंकी हमले में शहीद 40 सीआरपीएफ जवानों में ज्यादातर के शव इतने क्षत-विक्षत हो गए थे कि साथी जवान आधार कार्ड, छुट्टी की अर्जी और सेना के परिचय पत्र से ही उनकी पहचान कर पाए। अधिकारियों ने बताया कि धमाके में शवों की हालत ऐसी हो गई थी कि पहचान करना मुश्किल था। उनकी जेबों से मिले कागजात और अन्य सामान से ही पहचान की जा सकी। कुछ शहीदों के साथियों ने घड़ियों या वालेट से उनकी पहचान की। बता दें गुरुवार को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। भारतीय सेना को हमले का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से खुली छूट भी मिल गई है। सीआरपीएफ के काफिले में 78 गाड़ियां थीं और करीब 2500 जवान शामिल थे। हाई इन्टेनसिटी प्रभाव वाले विस्फोटक से हुए धमाके में शव क्षत विक्षत हो गए। ऐसे में जवानों की पहचान कर पाना काफी मुश्किल हो गया था। जम्मू कश्मीर में तैनात सीआरपीएफ के अधिकारियों ने जवानों के परिवार को हजारों फोन करने जैसा कठिन काम भी किया है। उन्होंने उन्हें जानकारी दी है कि शहीद जवानों की पहचान सही हुई है और कोई लापता नहीं है। एक जवान दिल्ली में पाया गया जबकि एक जम्मू में किसी जरूरी काम के चलते काफिले में शामिल नहीं हो पाया था।
दिल्ली स्थित सीआरपीएफ के मुख्यालय ने 40 शहीद जवानों की सूची शुक्रवार शाम जारी की थी। जवानों की पहचान फोरेंसिक प्रोफाइलिंग और उनके सामान द्वारा की गई। ये सामान हमले वाली जगह से बरामद किया गया जिसके बाद पहचान पता करने का काम हुआ। अमेरिका समेत कई देश ने कहा है कि वह आतंक के खिलाफ भारत के साथ खड़े हैं। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने शुक्रवार को अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल से फोन पर बात की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका आतंक के खिलाफ भारत के साथ खड़ा है और भारत को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है। उन्होंने पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए आतंकी हमले को लेकर डोभाल से चर्चा की। बता दें इस हमले में सेना के 40 जवान शहीद हो गए हैं और पांच घायल हुए हैं।



