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अभिनंदन को छोड़ना पाक की मजबूरी, जानें क्या है जिनीवा कन्वेंशन

नई दिल्ली। पाकिस्तान ने बुधवार यानी 27 फरवरी को भारतीय सैन्यप्रतिष्ठानों पर हवाई हमले की नाकाम कोशिश की। पूरी तरह तैयार भारतीय वायुसेना ने न सिर्फ पाक के F-16 लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया, बल्कि एक F-16 को मार गिराया। हालांकि, इस दौरान देश का एक मिग-21 नष्ट हो गया। विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान लापता हैं, हालांकि पाकिस्तान ने दावा किया कि अभिनंदन उनके कब्जे में हैं और उनके कुछ फोटोज व विडियो भी जारी किए। विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान के के विडियो को पाकिस्तान ने सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया, जो जिनीवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन है। भारत और पाकिस्तान के बीच भले ही युद्ध न छिड़ा हो, फिर भी अभिनंदन उन सभी अधिकारों के हकदार हैं, जो जिनीवा कन्वेंशन के तहत प्रिजनर ऑफ वॉर (PoW) यानी एक युद्धबंदी को मिलती हैं। PoW के साथ किस तरह का व्यवहार होना चाहिए, इसके बारे में 1949 का जिनीवा कन्वेंशन साफ-साफ कहता है कि यह उन सभी मामलों में लागू होता है, चाहे घोषित युद्ध का मामला हो या नहीं। इस तरह, पाकिस्तान को विंग कमांडर अभिनंदन को हर हाल में छोड़ना ही होगा, क्योंकि पाकिस्तान ने भी जिनीवा कन्वेंशन पर दस्तखत किए हैं।
भारतीय युद्धबंदियों के साथ पाकिस्तान के व्यवहार का ट्रैक रेकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। 1999 के करगिल संघर्, के दौरान इंडियन एयरफोर्स के पायलट अजय आहुजा अपने विमान से सुरक्षित कूद चुके थे। भारत का दावा है कि पाकिस्तानी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी। इसी तरह एक और पायलट नचिकेता को भी पाकिस्तानी सेना ने अगवा कर लिया था। हालांकि, बाद में जिनीवा कन्वेंशन को लेकर भारत के दबाव के बाद पाकिस्तान को आखिरकार 8 दिनों बाद नचिकेता को भारत को लौटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जिनीवा संधि के तहत, युद्धबंदियों को न तो डराया-धमकाया जा सकता है और न ही अमानवीय व्यवहार किया जा सकता है। आज हम इसी जिनीवा कन्वेंशन यानी जिनीवा संधि के बारे में बात करेंगे।

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