यूएन में तुर्की ने उठाया कश्मीर का मुद्दा तो भारत ने दिलाई साइप्रस की याद

September 23, 2021

यूएन में तुर्की ने उठाया कश्मीर का मुद्दा तो भारत ने दिलाई साइप्रस की याद

न्यूयॉर्क,23 सितंबर। संयुक्त राष्ट्र में तुर्की ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। संयुक्त राष्ट्र संघ के 76वें सत्र के दौरान तुर्की के राष्ट्रपति ने कश्मीर पर टिप्पणी की। भारत ने भी इसका जोरदार जवाब दिया और तुर्की का कमजोर कड़ी साइप्रस पर कब्जे का मुद्दा उठा दिया। बता दें कि तुर्की कई दशक से साइप्रस के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है। मंगलवार को यूएन में भाषण देते समय तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने कहा कि कश्मीर पर 74 साल से समस्या जारी है। हमारा मानना है कि दोनों पक्षों को संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर इसे हल कर लेना चाहिए। जब भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के बोलने की बारी आई तो उन्होंने साइप्रस का मुद्दा उठा दिया। इस मुद्दे पर यूएन प्रस्ताव पारित कर चुका है, जिसे तुर्की नहीं मानता। जयशंकर यहीं पर नहीं रुके, उन्होंने साइप्रस के विदेश मंत्री निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की। जयशंकर ने कहा कि साइप्रस को लेकर यूएन में जो प्रस्ताव पारित हुआ है, उसका पालन किया जाना चाहिए। इसके अगले दिन बुधवार को जयशंकर ने क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ मुलाकात की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की। जयशंकर ने लिखा कि दोनों देश आपसी संबंध मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। बता दें कि पहले भी एर्दोगान यूएन में कश्मीर का मसला उठा चुके हैं। साइप्रस, तुर्की के दक्षिण, सीरिया के पश्चिम और इजराइल के उत्तर पश्चिम में स्थित एक द्वीप है। यहां यूनानी नस्ल के अलावा तुर्की नस्ल के लोग भी रहते हैं। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। 1974 में तख्तापलट की कोशिश के बाद तुर्की ने साइप्रस पर आक्रमण कर दिया और प्रसिद्ध शहर वरोशा पर कब्जा कर लिया। यह शहर कभी पर्यटकों से भरा रहता था, लेकिन अब खाली पड़ा है। तुर्की के 35 हजार सैनिक इस द्वीप पर तैनात हैं। साइप्रस इस वक्त 2 हिस्सों में बंटा हुआ है। तुर्की नस्ल के लोगों ने अपने क्षेत्र को एक अलग देश घोषित कर दिया। हालांकि इसे तुर्की के अलावा किसी देश से मान्यता नहीं मिली है। जबकि ग्रीक नस्ल वाले साइप्रस को संयुक्त राष्ट्र संघ सहित पूरी दुनिया स्वीकार करती है।