नवरात्रि का सातवां दिन ,मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा

October 12, 2021

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। आज नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध करने के लिए अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया था।
ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार देवी कालरात्रि, शनिदेव को नियंत्रित करती हैं। नवरात्रि में इनकी विधि-विधान से पूजा अर्चना करने पर शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। मां कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी माना जाता है। इसलिए मां दुर्गा के इस स्वरूप को कालरात्रि कहा जाता है। देवी भक्तों के सभी दुःख और संताप दूर करती हैं। इनकी पूजा से भक्त अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है।
सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां के समक्ष पूजन का संकल्प लें। मां कालरात्रि को अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाएं। मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी और प्रिय भोग गुड़़ अर्पित करना चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा कथा और मंत्रों का जाप करें और आरती कर अंत में प्रणाम करें। इस दिन ब्राह्माणों को दान अवश्य करना चाहिए।

मां कालरात्रि की पूजा का महत्व

मां कालरात्रि की पूजा जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा करती हैं। मां कालरात्रि की कृपा से बुरी शक्तियों का प्रभाव समाप्त हो जाता है। मां कालरात्रि शत्रु और दुष्टों का संहार करती हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने से तनाव, अज्ञात भय और बुरी शक्तिओं दूर होता है। कृष्ण वर्ण के कारण माता को कालरात्रि कहा जाता है। मां कालरात्रि की चार भुजाएं हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, असुरों के राजा रक्तबीज का संहार करने के लिए दुर्गा मां ने मां कालरात्रि का रूप लिया था। मां कालरात्रि के पूजन से भक्तों को भय से छुटकारा मिल जाता है।