अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध मौत

September 21, 2021

शिष्य आनंद गिरी हरिद्वार से गिरफ्तार

हरिद्वार, 21 सितंबर। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के मामले में उनके शिष्य आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। देर शाम उत्तर प्रदेश से सहारनपुर पुलिस और एसओजी की टीम हरिद्वार के आश्रम में पहुंची थी और करीब डेढ़ घंटे की पूछताछ के बाद आनंद गिरि को गिरफ्तार कर साथ ले गई। महंत नरेंद्र गिरि की प्रयागराज में सोमवार को संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने अपने शिष्य आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी व उनके बेटे संदीप तिवारी को मौत की वजह बताया था। उत्तर प्रदेश पुलिस की सूचना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने देर रात को ही हरिद्वार के आश्रम में आनंद गिरि को हिरासत में ले लिया था। आनंद के बाद आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी यूपी पुलिस ने पूछताछ के लिए प्रयागराज से हिरासत में ले लिया। सोमवार शाम से ही उत्तराखंड पुलिस आनंद गिरि के कांगड़ी गाजीवाली स्थित आश्रम पहुंच गई थी और उन्हें हाउस अरेस्ट कर रखा था। रात करीब साढ़े 10 बजे यूपी की सहारनपुर पुलिस तथा एसओजी की टीम पहुंची और बंद कमरे में करीब एक घंटे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर साथ ले गई। हरिद्वार एसपी सिटी कमलेश उपाध्याय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पुलिस आनंद गिरि को राज्य में लेकर चली गई है, क्योंकि यह मामला उत्तर प्रदेश का है। नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में शुरुआती तौर पर शिष्य आनंद गिरि, लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी का नाम सामने आ रहा है। इन तीन चेहरों के अलावा 4 अन्य लोगों का नाम भी इस हत्याकांड से जुड़ रहा है। आनंद गिरि के मुताबिक मठ की संपत्ति को बेचकर कई लोगों ने बड़ी-बड़ी हवेलियां बनवाई हैं। इनमें नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मी अजय सिंह, मनीष शुक्ला, अभिषेक मिश्रा, शिवेक मिश्रा का नाम शामिल है। इन लोगों की नजर मठ की संपत्ति पर थी।गुरुजी ने मनीष शुक्ला की शादी करवाई थी। उसे करोड़ों का घर भी दिया था। अभिषेक मिश्रा को भी गुरुजी ने करोड़ों का घर दिया था। इसके साथ ही शिवेक मिश्रा ने करोड़ों खर्च कर घर बनवाया था। गुरुजी ने इसे भी सहयोग किया था। आनंद गिरि ने आगे बताया कि गुरुजी ने डॉक्टर समेत कई उद्योगपतियों से कर्ज ले रखा था। मई के बाद मेरी गुरुजी से मुलाकात नहीं हुई। हमारी आखिरी मुलाकात लखनऊ में हुई थी। उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि यूपी पुलिस के फोन आने के बाद आनंद गिरि को हरिद्वार आश्रम में पुलिस निगरानी में रखा था। इससे पहले आनंद गिरि ने खुद को बेगुनाह बताते हुए इसे बहुत बड़ा षड्यंत्र बताया है। पुलिस हिरासत में लिए गए आनंद गिरि के मुताबिक गुरुजी की हत्या कर मुझे फंसाने की साजिश की जा रही है। मठ की जमीन हड़पने और वर्चस्व को लेकर महंत जी की हत्या की गई। पैसे वसूलने वालों ने एक बड़ी साजिश को अंजाम दिया है। सुसाइड नोट की भी जांच होनी चाहिए। ये गुरुजी नहीं लिख सकते। मेरा नाम एक षड्यंत्र के तहत लिखा गया है। मैंने अपना पूरा जीवन गुरुजी के साथ बिताया है और कभी भी उनसे कोई पैसा नहीं लिया। मेरे और गुरु जी के बीच सब कुछ अच्छा था। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस मामले की पूरी जांच करें।
आईजी रेंज केपी सिंह ने बताया कि मौके से 7 पेज का सुसाइड नोट मिला है। इसमें महंत नरेंद्र गिरि ने वसीयतनामा की तरह लिखा है, इसमें शिष्य आनंद गिरि का भी जिक्र है। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में यह जिक्र भी किया है कि किस शिष्य को क्या देना है? कितना देना है? सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह अपने कुछ शिष्यों के व्यवहार से बहुत ही आहत और दुखी हैं और इसीलिए वह सुसाइड कर रहे हैं। पहली नजर में यह सुसाइड का ही मामला समझ में आ रहा है।