योग प्रशिक्षिका राफिया पर समाज को है नाज़

October 12, 2021

नई दिल्ली 12 अक्टूबर। योग भारत की पहचान है। यह भारत की ओर से दिया गया वह उपहार है जो पूरी दुनिया के लिए वरदान है। 21 जून को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में हमें योग की जीवन में महत्ता एक मूलभूत आवश्यकता के रूप में उभर कर सामने आई । यूं तो देश-विदेश में कई योग गुरु मौजूद हैं, जो योग के ज़रिए लोगों को शारीरिक और मानसिक रूप से मज़बूत कर रहे हैं। मगर, झारखंड के रांची की रहने वाली राफ़िया नाज़ की कहानी सबसे अलग है। इनकी कहानी जानने के बाद आप भी इनपर नाज़ करेंगे। राफ़िया, आज योग के ज़रिए देश के बच्चों और युवाओं को एक बेहतरीन इंसान बना रही हैं। आज राफिया योग में इतना रम गई हैं कि उन्होंने अपना जीवन ही योग के प्रति समर्पित कर दिया है। इन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। हालांकि, ये सब इतना आसान नहीं था। इसके लिए ये कट्टरपंथियों के निशाने पर कई बार आईं भी, मगर बगैर परवाह किए हुए राफ़िया लोगों के जीवन में स्वास्थ्य का उजाला और चेहरे पर मुस्कान ला रही हैं।
राफ़िया नाज़ बताती हैं कि जब वो 4 साल की थीं, तभी उन्हें योग से प्रेम हो गया था। स्कूल में योग सिखाया जा रहा था, ऐसे में इन्होंने अपने पिता से योग सीखने की इच्छा जताई, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया गया। राफ़िया ने बताया कि योग सीखने के लिए माता और पिता ने हमेशा प्रोत्साहित किया। आज इनके कारण ही मैं योग की शिक्षा ले पाई हूं।
राफिया बताती है कि उनका योग सीखना कई कट्टरपंथियों को रास नहीं आया। मुस्लिम होने के कारण कई बार उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। राफ़िया बताती हैं कि ये सब मेरे लिए आसान नहीं था। हमेशा धमकी मिलती रही, मगर मैं अल्लाह के भरोसे अपने लक्ष्य की ओर चलती रही। मेरी फैमिली ने मेरा हमेशा सपोर्ट किया। योग के कारण मुझे इनसे निपटने की शक्ति मिली। राफ़िया पिछले 14 साल से योग सीख रही हैं और सीखा रही हैं। राफ़िया कहती हैं कि योग धर्म से ऊपर है। यह ज़िंदगी का पद्धति है। योग न हिन्दू है और ना ही मुसलमान, योग सिर्फ योग है। आज मेरे साथ कई मुस्लिम बच्चे योग सीखते हैं।
वास्तव में राफिया नाज़ का हौसला काबिले तारीफ है। कट्टरपंथियों की नाराजगी झेलने के बावजूद उन्होंने न सिर्फ जीवन में एक मुकाम हासिल किया है बल्कि आज वह सैकड़ों लोगों के जीवन में खुशियों का माध्यम भी बनी हुई है।