पेंडोरा पेपर्स खोलेंगे धनकुबेरों की काली कमाई का काला चिट्ठा

October 4, 2021

वाशिंगटन, 4 अक्टूबर। मध्य अमेरिकी देश पनामा को टैक्स हेवन्स कंट्रीज में गिना जाता है। अमीर लोग पैसे देकर यहां आसानी से नागरिकता हासिल कर सकते हैं। साथ ही इन्वेस्टमेंट के नियम और क़ानून भी बेहद आसान हैं। इसीलिए दुनिया भर के धनकुबेर अपनी काली कमाई को छुपाने के लिए पनामा का रुख करते रहते हैं। 2016 में पनामा पेपर्स लीक सामने आया था। इसे इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने लीक किया था। भारत समेत दुनिया के कई देशों के अमीरों के नाम सामने आए थे। अब पेंडोरा पेपर्स सामने आने वाले हैं। इन्हें भी इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ही दुनिया के सामने रखने जा रहा है।
उधर पनामा सरकार को डर है कि पेंडोरा पेपर्स की वजह से दुनिया में उसकी छवि को फ़िर से गहरा धक्का पहुंच सकता है। यही वजह है कि उसने एक लीगल फर्म के जरिए आईसीआईजे को यह पेपर जारी न करने के लिए ऑफिशियल लेटर भी जारी किया है। लेटर में कहा गया है- इन ताजा दस्तावेजों का जारी होना पनामा के बारे में फिर गलत धारणा बनाएगा। इससे पनामा और इसके लोगों को नुकसान होगा।
आईसीआईजे ने सोशल मीडिया पर बताया- हम रविवार को अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक जांच से संबंधित दस्तावेज जारी करेंगे। इसके लिए दुनियाभर में 12 करोड़ दस्तावेजों की जांच की गई है। 117 देशों के 600 जर्नलिस्ट्स इन्वेस्टिगेशन में शामिल हुए।
हालांकि पनामा सरकार का कहना है कि उसने निवेश से संबंधित कई सुधार किए हैं, लेकिन यह भी सच है कि यूरोपीय यूनियन ने अब भी पनामा को टैक्स हेवन देशों की लिस्ट में रखा है। पनामा सरकार कहती है कि 5 साल में उसने 3 लाख 95 हजार कंपनियों के रजिस्ट्रेशन सस्पेंड किए हैं। ​पनामा के बारे में कहा जाता है कि यहां फर्जी कंपनियां (शेल कंपनियां) बनाई जाती हैं और इनका इस्तेमाल संबंधित देशों में टैक्स चोरी के लिए किया जाता है।
इससे पहले 2016 में आईसीआईजे ने पनामा पेपर लीक किए थे जिसके जरिए काली कमाई के अवैध रास्तों तथा अवैध गठजोड़ का खुलासा किया गया था। यह विदेशी लीक की जांच और उससे जुड़ी लगभग 3.2 लाख विदेशी कंपनियों और ट्रस्टों के पीछे के लोगों का पता लगाने की कोशिश का हिस्सा थी। पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका के डेटा सेंटर से जुटाई गई इन गोपनीय सूचनाओं की चर्चा ‘पनामा पेपर्स’ के रूप में हुई थी। मोसेक फोंसेका की 1.15 करोड़ से ज्यादा फाइलें का डेटा लीक हुआ था। तब 1977 से 2015 के अंत तक की जानकारी दी गई थी। रविवार देर रात सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंडोरा पेपर्स में दुनिया के करीब 100 अरबपतियों के नाम हैं। इसके अलावा भारत, रूस, पाकिस्तान, ब्रिटेन और मैक्सिको के कुछ सेलेब्रिटीज के नाम भी इसमें शामिल हैं। इन पर शेल कंपनियां बनाने के भी आरोप हैं। जॉर्डन के किंग, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के अलावा यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति के नाम भी इन जारी दस्तावेजों में बताए गए हैं। हालांकि, अब तक इनकी विस्तार से जानकारी सामने नहीं आई है।