मां कात्यायनी देवी के पूजन से सफल होगा वैवाहिक जीवन

October 11, 2021

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर। नवरात्रि के छठवें दिन माता के छठे स्वरूप मां कात्यायनी देवी की पूजा-आराधना की जाती है। इस दिन विधि विधान से मां कात्यायनी देवी की आराधना करने से सुयोग्य वर-वधू की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां कात्यायनी देवी का जन्म कात्यायन ऋषि के आश्रम में हुआ था। कात्यायन ऋषि के तप से प्रसन्न होकर मां दुर्गा ने उनके घर जन्म लिया था। माता की चारो भुजाओं में अस्त्र शस्त्र और कमल का फूल विराजमान है। मां कात्यायनी देवी को बृज मंडल की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। इन्हें युद्ध की देवी भी कहा जाता है।
माता को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। अतः इस दिन पीला वस्त्र धारण कर माता को पीला फूल अर्पित करने और मिष्ठान्न का भोग लगाने से मां जल्दी प्रसन्न होती हैं। वहीं वैवाहिक जीवन के लिए भी माता की पूजा फलदायी होती है।
यदि कुण्डली में विवाह के योग क्षीण हो तो भी विवाह हो जाता है। जिन कन्याओं की कुण्डली में विवाह का योग नहीं बन रहा है या बार बार शादी विवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है उन्हें कात्यायनी देवी की पूजा अर्चना करनी चाहिए। पौराणिक कथाओं के अनुसार गोपियों ने भी कृष्ण जैसे वर की प्राप्ति के लिए मां कात्यायनी देवी की अराधना की थी। मां कात्यायनी देवी की पूजा करने से मनचाहे वर की प्राप्ति होती है और शादी विवाह में आ रही सभी अड़चनें दूर होती हैं।

मां कात्यायनी देवी मंत्र

ओम देवी कात्यायन्यै नम:।

मां कात्यायनी प्रार्थना मंत्र:

चन्द्रहासोज्जवलकरा शार्जलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी।।

स्तुति मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायानी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां कात्यायनी कवच मंत्र

कात्यायनौमुख पातु कां स्वाहास्वरूपिणी।
ललाटे विजया पातु मालिनी नित्य सुन्दरी।।
कल्याणी ह्रदयम् पातु जया भगामालिनी।।

अंत में आरती अवश्य करें। बता दें बिना आरती के माता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती इसलिए आरती करना ना भूलें।

मां कात्यायनी देवी आरती

जय कात्यायनी मां, मैया जय कात्यायनी मां।
उपमा रहित भवानी, दूं किसकी उपमां।।
मैया जय कात्यायनी मां।।

गिरिजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हां।
वर फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हां।।
मैया जय कात्यायनी मां।।

कर शशांक शेखर तप, महिषाशुर भारी।
शासन कियो सुर पर, बन अत्याचारी।।
मैया जय कात्यायनी मां।।

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुंचे अच्युत गृह।
महिषासुर बध हेतु, सुर कीन्हौं आग्रह।।
मैया जय कात्यायनी….

सुन पुकाप देवन मुख, तेज हुआ मुखरित।
जन्म लियो कात्यायनि, सुर नर मुनि के हित।
मैया जय कात्यायन, नाम का
मैया जय कात्यायनि…

आश्विन शुक्ल को महिषासुर मारा।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा।।
मैया जया कात्यायनि….

दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली।।
मैया जय कात्यायनि…

दीन्हौं पद पार्षद निज, निज जगत जननि माया।
देवी संग महिषासुर, रूप बहुत भाया।।
मैया जय कात्यायनि….

उमा रमा ब्रन्हाणी, सीता श्रीराधा।
तुम सुर-मुनि मन मोहनि, हरिये भव बाधा।।
मैया जय कात्यायनि…..
जयति मङ्गला काली, आद्या भवमोचनि।
सत्यानन्दस्वरूपणि, महिषासुर-मर्दनि।।
मैया जय कात्यायनि….

जय जय अग्निज्वाला, साध्वी भवप्रीता।
करो हरण दुख मेरे, भव्या सुपुनीता।।
मैया जय कात्यायनि….

अघहरिणि भवतारिणि, चरण-शरण दीजै।
ह्रदय निवासिनि दुर्गा कृपा-दृष्टि कीजै।।
मैया जय कात्यायनि….

ब्रह्मा अक्षर शिवजी, तुमको नित ध्यावै।
करत अशोक नीराजन, वाञ्छितफल पावै।।
मैया जय कात्यायनि…