पूजा पाठ में सुगंध का महत्व

October 3, 2021

नई दिल्ली 3 अक्टूबर। भारतीय दर्शन में ही नहीं बल्कि विश्व भर के विभिन्न पूजा पद्धतियों में किसी ना किसी प्रकार की सुगंध का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए अगरबत्ती, धूप बत्ती, लोबान तथा अन्य विभिन्न प्रकार की सामग्रियों का प्रयोग कर पूजा स्थल को सुगंध में बनाया जाता है। भारतीय सनातन धर्म परंपरा में पूजा पाठ, अगरबत्ती धूप या कपूर के बिना अधूरा माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा पाठ में सुगंध का क्या महत्व है। शास्त्रों के अनुसार पूजा स्थल पर अगरबत्ती, धूपबत्ती या कपूर जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है और समस्त नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। तथा आसपास का माहौल खुशनुमा हो जाता है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि धुएं के माध्यम से उपासक की वंदना को ईश्वर तक पहुंचाया जाता है। सुगंध आसपास की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार करती है।
अगरबत्ती जलाने का आध्यात्मिक महत्व भी है। कहा जाता है कि देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए अगरबत्ती सबसे आसान उपाय है। अगरबत्ती जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है। कहते हैं कि इससे गृह क्लेश और पितृदोष का भी शमन हो जाता है व घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
वहीं धूपबत्ती से निकलने वाले धूप का भी आध्यात्मिक महत्व है। कहा जाता है कि धूपबत्ती से निकलने वाला धुआं उपासकों का होता है। इसके माध्यम से भक्तों की प्रार्थना सीधे भगवान के पास पहुंचाई जाती है। धूपबत्ती की सुगंध भक्तों का मनोबल बढ़ाती है और आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती है। इससे मन शांत रहता है और परिवार में रहने वाले सभी सदस्यों के रोग-शोक दूर होते हैं।
अगरबत्ती और धूपबत्ती जलाने से इससे निकलने वाला धुआं ना केवल मन को शांत रखता है बल्कि यह वातावरण को शुद्ध कर खुशनुमा बनाता है। हर‍ि दर्शन सेवाश्रम के एमडी गोल्‍डी नागदेव बताते हैं क‍ि धूप और अगरबत्‍ती से से निकलने वाली सुगंध आपके मन को शांत रखती है। आप जब किसी धार्मिक आयोजन में बैठते हैं तो शांत महसूस करते हैं और पूजा पाठ में ध्यान केंद्रित होता है। अगरबत्ती और धूपबत्ती बनाने के लिए अलग-अलग जड़ी बूटियों और सुगंधित चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि सनातन धर्म के कुछ लोग अगरबत्ती जलाने को लेकर एक अलग धारणा रखते हैं। उनका कहना है कि बांस से बनी अगरबत्ती घर में कदापि नहीं जलानी चाहिए। बांस जलाने का उपयोग केवल चिता अथवा शव के आसपास ही किया जाता है। अतः पूजा पाठ के समय हमें बिना बांस के बनी हुई अगरबत्ती का ही प्रयोग करना चाहिए। इसके अतिरिक्त कुछ धन लोलुप कंपनियां घटिया सामग्री तथा केमिकल आदि की सहायता से अगरबत्ती और धूपबत्ती का निर्माण करती हैं। ऐसे घटिया उत्पादों के प्रयोग से स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। अतः धूपबत्ती-अगरबत्ती खरीदते समय विश्वसनीय ब्रांड का अवश्य ध्यान रखना चाहिए।