दुनिया भर में गहराया ऊर्जा का संकट, चीन में उत्पादन घटा, यूरोप में बिजली महंगी

October 11, 2021

टोरंटो, 11 अक्टूबर। कोयले की कमी के चलते दुनिया भर में ऊर्जा का संकट गहरा गया है। अनेक देशों में पावर कट की शुरुआत हो चुकी है, तो वहीं ढेर सारे देश पावर कट की तैयारी में है क्योंकि उनके पास अपने थर्मल पावर प्लांट चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में कोयला नहीं बचा है। एक तरफ कोयला नहीं है तो दूसरी ओर नेचुरल गैस और तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। यूरोप में इस वर्ष की शुरुआत से अब तक नेचुरल गैस के दाम 400% जबकि बिजली के 250% बढ़ चुके हैं। चीन की फैक्ट्रियों में 18 फीसदी तक उत्पादन कम हो चुका है। दुनिया भर में बरतें ऊर्जा संकट पर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना काल के बाद सामान्य हालात लौटने पर उत्पादन क्षेत्र में अचानक बढ़ी मांग इसका बड़ा कारण है। अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में पूरी दुनिया में बिजली का संकट गहरा सकता है।
कोरोना काल के पश्चात ऊर्जा की बढ़ती मांग ने रीस्टॉकिंग की प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। प्राकृतिक गैस के लिए चीन की बढ़ती मांग ने भी किल्लत को और बढ़ा दिया है।
विश्लेषकों ने ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को ‘ग्रीनफ्लेशन’ करार दिया है। यूनाइटेड किंगडम बिजली की एक चौथाई जरूरतों को पवन ऊर्जा से पूरा कर रहा है। अमेरिकी और यूरोपियन यूनियन तेल कंपनियों ने 2015 और 2021 के निवेश को आधे से अधिक कम कर दिया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि ऊर्जा आपूर्ति कुछ और समय बाधित रह सकती है। उत्पादकों को ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाने में मूल्य नियंत्रण सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है।
इसी माह 31 तारीख को जलवायु परिवर्तन पर ग्लासगो में कॉप-26 बैठक होने वाली है। इस बैठक में कोयले के उत्खनन पर अहम फैसले किए जाने की संभावना है।