अमेरिका में 1 डॉलर स्टोर्स पर कोरोना की मार

October 4, 2021

वाशिंगटन, 4 अक्टूबर। अमेरिका में वन डॉलर स्टोर लंबे समय से निम्न तथा निम्न मध्यम वर्ग की पहली पसंद रहे हैं। इन स्टार्स के माध्यम से इन वर्गों के लाखों करोड़ों लोगों की जरूरतें पूरी होती रही है। लाखों लोगों के लिए ये स्टोर्स रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लाइफ लाइन रहे हैं। अमेरिकी समाज का एक बड़ा वर्ग इस पर निर्भर रहता है। लेकिन कोरोना काल का इन स्टोर्स पर विपरीत असर पड़ा है। कई स्टोर्स बंद हो गए और बहुत से स्टोर्स पर तालाबंदी का खतरा मंडरा रहा है। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। माल नहीं होने के कारण स्टोर्स खाली पड़े हैं। स्टाेर्स में बिक्री नहीं होने से कर्मचारियों को नियमित वेतन मिलने के भी लाले पड़ गए हैं। उन्हें या तो पगार नहीं मिल रही या फिर कम मिल रही है।
गौरतलब है कि अमेरिका में बरसों से वन डॉलर स्टोर्स का बिजनेस मॉडल काफी सफल रहा। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोग इस पर निर्भर रहते हैं। ग्रामीण अमेरिका में ऐसे कई स्टोर्स थे। अब हालात ये हैं कि कुछ ही स्टोर्स खुले हुए दिखाई देते हैं। मेन शहर के एक डॉलर स्टोर में काम करने वाली सैंड्रा कहती हैं कि वे सप्ताह में 70 घंटे काम करने से ऊब चुकीं हैं। डालर स्टोर उन्हें एक घंटे का 12 डॉलर वेतन दे रहा है जबकि इतने ही काम के लिए वॉलमार्ट हर घंटे के 16 डॉलर देता है। काम के घंटे भी डॉलर स्टोर में बहुत कठिन हैं। डॉलर ट्री के मिखाइल विटयेन्स्की का कहना है कि इस वर्ष अब तक माल भाड़े में भी कई गुना वृद्धि हुई है। स्टोर्स में आने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्टोर्स अपनी ब्रांच खोल रहे हैं। ऐसे में डॉलर स्टाेर्स को अपना वजूद बचाए रखना बहुत कठिन हो रहा है। अमेरिका में कोरोना काल के बाद अब ओपन अमेरिका का दौर चल रहा है लेकिन डॉलर स्टाेर्स के लिए आर्थिक परेशानियां काफी ज्यादा हैं। अमेरिकी समाज में अश्वेत और कम आय वर्ग के लोगों में डॉलर स्टोर्स काफी लंबे समय तक लोकप्रिय रहे हैं। बहुत से घरों में राशन और अन्य चीजों की जरूरत इन्हीं से पूरी होती थी।
सेल्फ रिलांयस ग्रुप की स्टेसी मिशेल का कहना है कि चीन से आने वाले समुद्री कंटेनर में यदि कोई एक भी कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो कंटेनर दो-तीन महीने तक डॉकयार्ड में ही रहता है। ऐसे में डॉलर स्टोर्स को सस्ते चीनी माल की सप्लाई ही नहीं हो पाती है। स्टोर्स में जब माल ही नहीं है तो फिर कर्मचारियों को वेतन कैसे मिलेगा। ऐसे में एक ओर जहां लाखों ग्राहकों को मिलने वाला एक सस्ता और अच्छा विकल्प धीरे-धीरे समाप्ति की ओर जा रहा है, वहीं हजारों लोगों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। हालांकि कुछ स्टोर के मालिक अभी भी आस लगा रहे हैं कि शीघ्र ही परिस्थितियां सामान्य हो जाएंगी और वे पहले की तरह अपना व्यापार सुचारू रूप से चला सकेंगे।