गुरुवार से हो रहा शारदीय नवरात्र का प्रारंभ, सुख समृद्धि के लिए करें घट स्थापना

October 6, 2021

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर। सनातन धर्म में नवरात्र का एक अलग ही महत्व है। नवरात्र वर्ष में दो बार आते हैं। वर्षा काल के उपरांत शरद ऋतु प्रारंभ होने पर शारदीय नवरात्रों का प्रादुर्भाव होता है। हिंदी पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होती है और महानवमी के दिन समाप्त होती है। उसके अगले दिन विजय दशमी या दशहरा का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जाता है
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि को बहुत महत्व दिया जाता है। लोग नवरात्रि भर उपवास रखते हैं और 9 दिन में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। तृतीया और चतुर्थी तिथि एक साथ पड़ने के कारण इस बार की नवरात्रि 8 दिनों की होगी। नवरात्रि व्रत का समापन 14 अक्टूबर को होगा तथा 15 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाया जाएगा।
नवरात्रि में घट स्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन ही कलश स्थापना या घट स्थापना करके मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। जो लोग नवरात्र के दौरान सभी व्रत धारण करते हैं , उन्हें कलश स्थापना के साथ नवरात्रि व्रत एवं मां दुर्गा की पूजा का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद व्रत व पूजा प्रारम्भ करना चाहिए।
इस बार कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त व समय केवल 50 मिनट का ही है। पंचांग के अनुसार घटस्थापना के लिए शुभ समय सुबह 06 बजकर 17 मिनट से सुबह 07 बजकर 07 मिनट तक ही है। व्रती को इस शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापित कर लेना चाहिए।
शारदीय नवरात्रि में माता रानी की पूजा के लिए- मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो, दुर्गा चालीसा व आरती की किताब, दीपक, घी/ तेल, फूल, फूलों का हार, पान, सुपारी, लाल झंडा, इलायची, बताशे या मिसरी, असली कपूर, गाय के गोबर से बने उपले, फल व मिठाई, कलावा, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी, जौ, वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सिंदूर, केसर, कपूर, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, सुगंधित तेल, चौकी, आम के पत्ते, नारियल, दूर्वा, आसन, पांच मेवा,नैवेद्य, शहद, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, लाल रंग की गोटेदार रेशमी चुनरी, लाल चूड़ियां, कमल गट्टा, लोबान, गुग्गुल, लौंग, हवन कुंड, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, दीपबत्ती, माचिस, कलश, साफ चावल, कुमकुम,मौली, श्रृंगार का सामान आदि की आवश्यकता होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन नियम और निष्ठा के साथ मां आदिशक्ति के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और सभी समस्याओं का निवारण होता है।