अफगानिस्तान के हालात पर पैनी नजर रख रहा अमेरिका

October 2, 2021

वॉशिंगटन,2 अक्टूबर। अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बाद से पूरी दुनिया में आतंकवाद के प्रसार का भय फैला हुआ है। अनेक देशों ने आशंका जताई है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकी गुटों द्वारा किया जा सकता है। अमेरिका भी इस खतरे को लेकर अपनी रणनीति बनाने में लगा है। अफगानिस्तान से अपने सैनिकों की वापसी के बाद भी अमेरिका वहां के हालात पर पैनी नजर रख रहा है। ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ जनरल मार्क मिले के मुताबिक, यूएस आर्मी की अफगानिस्तान से वापसी के बाद तालिबान और अलकायदा एक दूसरे के साथ फिर जुड़ रहे हैं और इससे दुनिया के सामने फिर नया खतरा पैदा हो रहा है। कुछ दिनों पहले एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अलकायदा बहुत तेजी से अफगानिस्तान में फिर पैर पसार रहा है और अमेरिकी सैनिकों की अफगानिस्तान से वापसी के बाद यह संकट दोगुना हो जाएगा। अफगानिस्तान में सैन्य कमान संभालने वाले तमाम अमेरिकी अफसर यूएस सीनेट की आर्म्ड फोर्सेस कमेटी के सामने पेश हो रहे हैं। मंगलवार को भी कुछ अफसर इस कमेटी के सामने पेश हुए। इनमें जनरल मार्क मिले भी शामिल हैं। सीनेट की कमेटी ने इन अफसरों से तीखे सवाल किए। एक सवाल तालिबान और अलकायदा के रिश्तों को लेकर भी किया गया। इसके जवाब में जनरल मार्क ने कहा- तालिबान से यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि वो अलकायदा से रिश्ते नहीं रखेगा। तालिबान ने अलकायदा से अपने रिश्ते नहीं तोड़े हैं।अमेरिकी एडमिनिस्ट्रेशन के पास अलकायदा और तालिबान के बीच रिश्तों को लेकर पक्की खुफिया रिपोर्ट्स हैं। इनमें बताया गया है कि तालिबान के हुकूमत पर कब्जा करने के बाद अलकायदा ने तेजी से पैर पसारना शुरू किया है। हालात कितने गंभीर होते जा रहे हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने तालिबान को दी गई वॉर्निंग की जानकारी कमेटी के सामने पेशी के दौरान दी थी। ब्लिंकन ने कहा था- हमने तालिबान को साफ बता दिया है कि अगर अलकायदा की तरफ से अमेरिका के खिलाफ कोई हरकत होती है तो इसकी जिम्मेदारी तालिबान की होगी। सितंबर के शुरू में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और सीआईए चीफ सीनेट कमेटी के सामने पेश हुए थे। इस दौरान दोनों ने इस कमेटी को बताया था कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अलकायदा फिर एकजुट होने और संशाधन जुटाने की कोशिश कर रहा है। ऑस्टिन के मुताबिक, तालिबान से दोहा में हुआ एग्रीमेंट अफगान सैनिकों की हार का सबसे बड़ा कारण था। ऑस्टिन के मुताबिक, दोहा समझौते की वजह से अफगानिस्तान के सैनिकों का हौसला पस्त हो गया और इसका फायदा सीधे तौर पर तालिबान ने उठाया।