पाकिस्तान में बेरोजगारी से हाल बेहाल, चपरासी की नौकरी के लिए 15 लाख उम्मीदवार

September 29, 2021

इस्लामाबाद,29 सितंबर। पाकिस्तान में बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स ने नए आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें बेरोजगारी दर 16 प्रतिशत से ज्यादा बताई गई है। यहां फिलहाल 24 प्रतिशत पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार हैं। इस रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री इमरान खान के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान में बेरोजगारी दर के 6.5 प्रतिशत होने का दावा किया था।पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार में छपी एक रिपोर्ट से यहां की बेरोजगारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में पाकिस्तान के कोर्ट में चपरासी के पद पर वैकेंसी निकली थी, जिसके लिए 15 लाख लोगों ने आवेदन किया। इस नौकरी के लिए आवेदन करने वालों में एम.फिल किए हुए लोग भी शामिल हैं। इंस्टीट्यूट ने योजना और विकास पर सीनेट की स्थायी समिति के सामने अपने सर्वे की ब्रीफिंग दी। इसमें बताया गया कि 40 प्रतिशत ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट देश में बेरोजगार हैं। इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं, जिन्होंने बेहतर नौकरी की चाहत में एम.फिल में दाखिला लिया है। अगर इन्हें आंकड़ों में शामिल किया जाए, तो बेरोजगारी दर और ज्यादा हो जाएगी। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के सर्वे में बताया गया है कि देश में बेरोजगारी 2017-18 में 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 2018-19 में 6.9 प्रतिशत हो गई है। इमरान सरकार में एक साल के अंदर बेरोजगारी दर तेजी से बढ़ी है। पुरुष बेरोजगारी दर 5.1 से बढ़कर 5.9 प्रतिशत और महिला बेरोजगारी दर 8.3 से बढ़कर 10 प्रतिशत हो गई है।लॉकडाउन के चलते करीब 2 करोड़ लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस साल जून में रिलीज किए गए आर्थिक सर्वे में कोरोना महामारी से पड़ी मार को विस्तार से बताया गया। इसमें कहा गया कि महामारी के कारण नौकरियों पर भारी असर पड़ा है। पाकिस्तान में लॉकडाउन के चलते करीब 2 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में 9वीं सबसे ज्यादा मजदूरों की मौजूदगी पाकिस्तान में है। पाकिस्तान के आर्थिक विशेषज्ञों ने देश की बढ़ती बेरोजगारी और बिगड़ते आर्थिक हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अब भी आवश्यक कड़े कदम नहीं उठाए तो स्थिति और भयावह हो सकती है।