विदेश से लौटने पर एमजे अकबर पर बड़ा फैसला कर सकती है सरकार

October 11, 2018

नई दिल्ली यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सात महिला पत्रकारों ने अलग-अलग समय पर एमजे अकबर पर उनका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। सरकार के सूत्रों का कहना है कि इन आरोपों ने सरकार के लिए ‘असहज’ स्थिति उत्पन्न कर दी है। महिला पत्रकारों का आरोप है कि संपादक रहुते हुए एमजे अकबर ने उनका यौन उत्पीड़न किया। वहीं, अकबर ने इन आरोपों पर अपना कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इस बीच, समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि एमजे अकबर के बारे में सरकार जल्द ही कोई बड़ा फैसला कर सकती है। सरकार से जुड़े एक सूत्र का कहना है, ‘मंत्री पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों पर वरिष्ठ नेता असहज स्थिति महसूस कर रहे हैं।’ सूत्र का कहना है कि बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में अकबर पर लगे आरोपों पर चर्चा तो नहीं हुई लेकिन ‘वरिष्ठ मंत्रियों ने अनौपचारिक रूप से इस पर चर्चा की और अपनी चिंता जाहिर की।’ बता दें कि एमजे अकबर अभी देश में नहीं हैं। वह नाइजीरिया के दौरे पर हैं।

महिला पत्रकारों के आरोपों पर विपक्ष हमलावर हो गया है। कांग्रेस सहित विपक्षी पार्टियों ने अकबर का इस्तीफा मांगा है। कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी बुधवार को कहा कि अकबर को चुप्पी तोड़ते हुए जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अकबर या तो संतोषजनक जवाब दें या अपने पद से इस्तीफा दे दें। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक नाइजीरिया के दौरे से वापस लौटने के बाद अकबर से इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है। अकबर दो-तीन दिनों में स्वदेश लौट सकते हैं। भाजपा के लिए अकबर पर लगे आरोपों का जवाब देने में इसलिए भी मुश्किल हो रही है क्योंकि यौन उत्पीड़न की ये घटनाएं उस समय की हैं जब वह भाजपा में शामिल नहीं हुए थे। अकबर के भारत आने को लेकर भी स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। कुछ लोगों का कहना है कि वह शुक्रवार तक लौट सकते हैं जबकि कुछ का कहना है कि वह एक सम्मेलन में भाग लेने गिनी जा सकते हैं। ऐसे में उनके 15 अक्टूबर तक लौटने की संभावना है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार या भाजपा नहीं चाहती कि अकबर पर लगे आरोपों का खामियाजा उसे भुगतना पड़े। इसे देखते हुए अकबर के स्वदेश लौटने पर उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है।