मोस्ट वॉन्टेड माओवादी नेता ‘हिडमा’ बना पुलिस के पहेली

September 17, 2018

रायपुर। छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में एक शख्स है जो हमेशा पुलिस बल से एक कदम आगे रहता है। उसे किसी ने नहीं देखा लेकिन हर खून-खराबे के पीछे वह मौजूद होता है। बस्तर में माओवाद को वह अपने दम पर चलाता है। सुरक्षाबलों को इस शख्स की तलाश है, जिसे वह ‘हिडमा’ कहते हैं। पुलिस का कहना है कि उसे देवा भी कहा जाता है, लेकिन उन्हें उसके बारे में कुछ नहीं पता। हिडमा हथियार उठाने से पहले क्या था, यह किसी को नहीं पता। बताया जाता है कि वह शायद 51 साल का है। छोटे कद का दुबला-पतला शख्स जिसकी सिर्फ पसलियां दिखती हैं। हालांकि, उसकी शक्ल क्या है, यह अभी भी रहस्य है। कुछ तस्वीरें सुरक्षाबलों के पास हैं जिनमें से कोई हिडमा की हो सकती है। हाल ही में सरेंडर करने वाले माओवादी नेता पहाड़ सिंह ने उसे गरिला कमांडर बताया है। पहाड़ ने बताया है कि हिडमा को पकड़ लेने से बस्तर में विद्रोही नेटवर्क की कमर टूट जाएगी। सबसे पहले हिडमा का नाम 2013 में झीरम घाटी नरसंहार में आया था। उसके बाद से सुरक्षाबलों पर हर बड़े हमले के बाद हिडमा का नाम सामने आता है।
झीरम घाटी में 2013 में माओवादी हमले में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत 27 लोग मारे गए थे। हिडमा का हाथ अप्रैल 2017 में बुर्कपाल हमले में भी आता है, जिसमें सीआरपीएफ के 24 जवान मारे गए थे। पुलिस का मानना है कि वह कोई स्थानीय आदिवासी था जो पीपल्स लिबरेशन गरिला आर्मी बटैलियन नंबर 1 और माओवादियों के साउथ सब-जोनल कमांड का अध्यक्ष बना। स्थानीय काडर उसे लेजंड कहते हैं। पुलिस का कहना है कि वह उनकी उम्मीदों पर खरा उतरकर काडर का मनोबल बढ़ाता है। हिडमा दक्षिण सुकमा क्षेत्र में रहता है जो उसका बेस है और वह चार-स्तरीय सुरक्षा के साथ चलता है। इस इलाके को लिबरेटेड जोन कहा जाता है। हालांकि, अब सुरक्षाबलों ने यहां अंदरूनी इलाकों में रास्ते बना लिए हैं और हिडमा को पकड़ने की कोशिश में लगे हैं। हाल के ऑपरेशन्स में सुरक्षाबलों ने हिडमा के कई ठिकाने ध्वस्त किए हैं लेकिन हर बार वह बच निकलता है। एक अधिकारी ने बताया कि वह एक दम बीच के क्षेत्र में रहता है, इसलिए उसका सुरक्षा घेरा तोड़ना मुश्किल है। उन्होंने बताया, ‘उसके गार्ड्स गोलीबारी में हमसे उलझते हैं जिससे उसे भागने में मदद मिलती है। हालांकि, जितनी बार हम उसे निशाना बनाते हैं, मुठभेड़ होती है और उसके कई नजदीकी लोग मारे जाते हैं। इससे उसका सपॉर्ट सिस्टम कमजोर होता है। बस कुछ समय की बात है।’