बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का मर्जर, खाताधारकों पर यह असर

October 18, 2018

मुंबई। बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के प्रस्तावित मर्जर से न केवल उनकी बैलेंस शीट और बैंकिंग सिस्टम, बल्कि उनके रिटेल कस्टमर्स पर भी असर पड़ेगा। अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में से किसी के साथ है तो आपको किन बदलावों का सामना करना पड़ सकता है इसके बारे में हम यहां आपको जानकारी दे रहे हैं।  आपको एक नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है। यह पक्का करें कि आपका ईमेल अड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड हो, जिससे किसी बदलाव के बारे में आपको तुरंत जानकारी मिल सके। आपके सभी अकाउंट एक आईडी के साथ टैग होंगे। उदाहरण के लिए, अगर आपका एक अकाउंट विजया बैंक और एक अन्य देना बैंक के साथ है, तो दोनों अकाउंट के लिए एक कस्टमर आईडी अलॉट की जाएगी। यह भी संभव है कि नई एंटिटी सिक्यॉरिटी की एक और परत जोड़ दे। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर (रिस्क एश्योरेंस), विवेक अय्यर ने बताया, ‘समान बैंक के साथ एक से अधिक अकाउंट के लिए कस्टमर आईडी एक ही होगी। हालांकि, जॉइंट होल्डर के लिए एक अलग यूजर आईडी जेनरेट की जा सकती है जिससे वह केवल संबंधित अकाउंट तक ही पहुंच सके।’

जिन कस्टमर्स को नए अकाउंट नंबर या आईएफएससी कोड अलॉट किए गए हैं, उन्हें इन डिटेल्स को विभिन्न थर्ड पार्टी एंटिटीज के साथ अपडेट करना होगा। इनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड और नैशनल पेंशन सिस्टम  शामिल हैं। आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस के चीफ एक्चुरियल ऑफिसर, अनिल कुमार सिंह ने कहा, ‘कस्टमर्स अपने पॉलिसी अकाउंट के जरिए ऑनलाइन या ब्रांच जाकर नए अकाउंट की डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं।’  मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (इसीएस) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा। अपने बैंक, फंड हाउस और इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर नए इसीएस निर्देश जारी करें। जरूरत होने पर आपको ECS से जुड़ा फॉर्म ऑनलाइन या अपनी ब्रांच के जरिए भरना होगा। ऑटो डेबिट या सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (सीप) के लिए आपको नया सीप रजिस्ट्रेशन और इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है। ऐसा ही लोन की ईएमआई के लिए भी करना होगा। कस्टमर्स को आमतौर पर 6-12 महीनों के लिए बाकी के चेक और मौजूदा चेक बुक का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है।

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रेसिडेंट (रिटेल लायबिलिटीज एंड ब्रांच बैंकिंग), विराट दीवानजी ने बताया, ‘ऑफिशल मर्जर की तिथि पर एक्वायर करने वाले बैंक की ओर से ऑफर किया जाने वाला फिक्स्ड डिपॉजिट रेट लागू होगा।’ हालांकि, मौजूदा फिक्स्ड डिपॉजिट पर मैच्योरिटी तक पहले से तय इंटरेस्ट मिलेगा। इसी तरह लोन पर इंटरेस्ट रेट भी वास्तविक एग्रीमेंट के अनुसार जारी रहेगा। होम लोन के लिए मौजूदा इंटरेस्ट रेट तब तक बरकरार रहेगा जब तक नई एंटिटी इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करती।